गांव की यह लड़की बनी राष्ट्रीय चैंपियन

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लखनऊ स्पोर्ट्स हॉस्टल काजल शर्मा दो साल पहले पिलखुआ के कंधोला गांव में खेतों की मेड़ों पर दौड़ती थी। घर से दौड़ते हुए बाजार जाती थी और वापस आती थी। स्कूल भी वह दौड़ते हुए जाती थी। दौड़ने की इसी लगन से काजल ने एक के बाद एक राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत लिए। शनिवार की शाम काजल ने गुजरात में हो रही राष्ट्रीय यूथ एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 2000 मीटर स्टीपलचेज में नए रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक जीत लिया। काजल ने इस दौड़ में 7 मिनट 11.99 सेकेंड का समय निकालकर नया मीट रिकार्ड बनाया। इससे पूर्व यह रिकार्ड (7 मिनट 21.23 सेकेंड) प्रियंका के नाम था। उन्होंने यह 2016 में बनाया था। काजल शर्मा तब सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने पिछले साल जनवरी में हुई राष्ट्रीय जूनियर क्रासकंट्री में स्वर्ण पदक जीता था। काजल शर्मा 15 साल की हैं। पिता देवेंद्र शर्मा कंधोला में खेती करते हैं। काजल की पांच बहने और एक भाई है। इतने बड़े परिवार का खर्च पिता खेती करके ही उठाते हैं। उनका परिवार आर्थिक तंगी से भी गुजर रहा है। पिछले साल उन्होंने अपनी बेटी का दाखिला खेल विभाग के एथलेटिक्स हॉस्टल में कराया था। इसके पीछे उनकी नीयत यही थी बेटी की पढ़ाई-लिखाई व भोजन मुफ्त में सरकार की तरफ से मिलेगा। खेलने में आगे निकल गई तो अच्छी जगह नौकरी मिल जाएगी। उनकी बेटी का जीवन दुरुस्त हो जाएगा। पिता ने जिस उम्मीद से काजल को 2016 में हॉस्टल में भर्ती कराया था उस पर काजल ने खरा उतरना शुरू कर दिया है। अपनी पहली ही राज्य क्रासकंट्री चैंपियनशिप में काजल चैंपियन बन गईं। इसके बाद अण्डर-16 की दो किलोमीटर राष्ट्रीय क्रासकंट्री का स्वर्ण पदक जीता। फिर तो हैदराबाद, विजयवाड़ा में हुई राष्ट्रीय जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत लिए। पिछले साल राष्ट्रीय चैंपियनशिप में अण्डर-18 वर्ग काजल ने 2000 मीटर स्टीपल चेज में 7 मिनट 29.69 सेकेंड का समय निकालते हुए स्वर्ण पदक जीता। पिछले साल नवम्बर में काजल ने राष्ट्रीय जूनियर चैंपियनशिप में 2000 मीटर स्टीपलचेज दौड़ में स्वर्ण पदक जीता।

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