मॉब लिंचिंग से निपटने को कानून में संशोधन करेगी सरकार

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केंद्र सरकार भीड़ द्वारा हत्या (मॉब लिंचिंग) को दंडनीय अपराध के तौर पर परिभाषित करने के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में संशोधन की संभावनाओं पर विचार कर रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने रविवार को बताया कि एक मॉडल कानून का मसौदा तैयार करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है जिसे राज्य सरकारें भीड़ हत्या की घटनाएं रोकने के लिए अपना सकें। उन्होंने कहा, सब कुछ शुरुआती चरण में है, क्योंकि केंद्र को नया कानून बनाने को कहने वाले उच्चतम न्यायालय के समूचे आदेश का परीक्षण करने की आवश्यकता है। यदि आईपीसी में संशोधन किया जाता है तो सरकार को भीड़ हत्या पर अलग से कोई कानून बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अधिकारी ने कहा कि यदि खुद को निर्दोष साबित करने का जिम्मा आरोपी पर डाल दिया जाता है तो सीआरपीसी एवं भारतीय साक्ष्य
हाल में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर लोगों की हत्या कर दिए जाने के कई मामले देश भर से सामने आए हैं। ताजा घटना राजस्थान में हुई जहां 20 जुलाई को गो तस्करी के संदेह पर भीड़ ने एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी। भारत में भीड़ हत्या की बढ़ती घटनाओं की निंदा करते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सरकार से कहा था कि वह ऐसे मामलों से निपटने के लिए कानून बनाए। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने भीड़ हत्या की घटनाओं को भीड़तंत्र का भयावह कृत्य करार दिया था। अलवर लिंचिंग: रहबर खान परिवार में अकेला शख्स था कमाने वालाराजस्थान में अलवर जिले के रामगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र में लालवंडी गांव में गौ तस्करी के शक में कथित भीड़ के हमले से एक व्यक्ति की मौत के मामले में पुलिस ने रविवार को एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी का नाम नरेश बताया जा रहा है। इस मामले में अब तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। तीनों को रामगढ़ अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अधीक्षक राजेंद्र सिंह ने घटनास्थल का दौरा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उधर, हिंदूवादी एवं गौरक्षक संगठनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस निर्दोष लोगों को फंसा रही है। गत शुक्रवार देर रात लालवंडी गांव में गाय ले जा रहे अकबर एवं उसके साथी पर भीड़ द्वारा गौ तस्कर समझकर हमला कर देने से अकबर की मौत हो जाने का मामला सामने आया था।

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