मानसून सत्रः लोकसभा में पांच अध्यादेशों पर कानून बनाने की कवायद

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सरकार ने पूर्व में जारी पांच अध्यादेशों को कानूनी रूप देने की ओर मजबूती से कदम बढ़ा दिया है। लोकसभा में सोमवार को इन अध्यादेशों से जुड़े विधेयक पेश किए गए। अब चर्चा के बाद इन विधेयकों को पास कराया जाएगा जिससे कानून बनने का रास्ता साफ होगा। इन पांच विधेयकों में से चार को संशोधित रूप में पेश किया गया है।
ये विधेयक पारित किए
जिन पांच विधेयकों पर कानून बनाया जाना है, उसमें राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय, दंड विधि संशोधन विधेयक 2018, दिवाला व शोधन अक्षमता संशोधन (दूसरा संशोधन), होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक-2018 और वाणिज्यिक न्यायालय, उच्च न्यायालय, वाणिज्यिक प्रभाग और वाणिज्यिक अपील प्रभाग (संशोधन) विधेयक-2018 शामिल है।
1-खेलों को बढ़ावा मिलेगा
-इस कार्ययोजना पर आधारित राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय विधेयक-2018 पेश किया गया।
-31 मई 2018 को राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय अध्यादेश लाया गया था।
-इस विधेयक के तहत अंतरराष्ट्रीय पद्धतियों के अनुरूप खेलकूद के राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र, खेलकूद विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन और कोचिंग से जुड़ी शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।
-बिल में मणिपुर में पहला राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।
2-बच्चियों से दुष्कर्म पर मौत की सजा
-इस पर नए कानून के लिए दंड विधि संशोधन विधेयक-2018 के नाम से बिल लाया गया है।
-कठुआ मामले के बाद 21 अप्रैल 2018 को दंड विधि संशोधन अध्यादेश-2018 लाया गया था।
-विधेयक के तहत 12 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं से दुष्कर्म पर मौत की सजा देने समेत दोषियों को सख्त दंड का प्रावधान है।
-बच्चियों से रेप में न्यूनतम सजा 20 साल करने के साथ ही महिलाओं से दुष्कर्म पर न्यूनतम सजा सात साल से बढ़ाकर 10 साल की गई है।
3-घर खरीदारों को बड़ा अधिकार
-इसके लिए दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (दूसरा संशोधन) विधेयक-2018 लाया गया है।
-जून 2018 में राष्ट्रपति ने इस कानून में संशोधन को लेकर जारी अध्यादेश को मंजूरी दी थी।
-इस विधेयक में घर खरीदारों को वित्तीय ऋणदाता का दर्जा दिया गया है, जिससे उन्हें ऋणदाताओं की समिति में प्रतिनिधित्व मिलेगा।
-इसके अलावा घर खरीदार गलती करने वाले डेवलपर के खिलाफ आईबीसी की धारा 7 के तहत शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
4-होम्योपैथी की गुणवत्ता में सुधार होगा
-इसके लिए होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक-2018 के नाम से बिल पेश किया गया है।
-18 मई 2018 को सरकार होम्योपैथी केंद्रीय परिषद कानून-1973 में बदलाव के लिए यह अध्यादेश लाई थी।
-इस विधेयक में परिषद का दोबारा गठन करने और इसे पारदर्शी बनाने की योजना शामिल है।
-अध्यादेश जारी होने से पहले अगर किसी ने होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज स्थापित किएं हैं या नए कोर्स शुरू किए हैं तो उसे एक साल के भीतर सरकार की मंजूरी लेनी होगी
-ऐसा न होने पर उस कॉलेज से पास होने वाले छात्रों को मेडिकल क्वालिफिकेशन एक्ट के तहत मान्य नहीं किया जाएगा।
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5-वाणिज्यिक विवाद जल्द निपटेंगे
-इसके लिए वाणिज्यिक न्यायालय, उच्च न्यायालय वाणिज्यिक प्रभाग और वाणिज्यिक अपील प्रभाग संशोधन विधेयक-2018 लाया गया है।
-मई 2018 में सरकार कारोबारी सुगमता को कानून बदलने के लिए यह अध्यादेश लाई थी।
-इस विधेयक के तहत व्यावसायिक विवादों को तेजी से निपटाने में मदद मिलेगी।
-इस कानून में विवादों की न्यूनतम मूल्य सीमा एक करोड़ से घटाकर तीन लाख की जाएगी।
-इससे कम मूल्य के विवादों को निपटाने में लगने वाला समय भी कम किया जा सकेगा।

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