सुपर 30 के नाम पर चलती है रामानुुजम क्लासेज, आनंद लेते हैं मोटी फीस!

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पटना में सुपर 30 का किस तरह से सुपर खेल चलता था इसका खुलासा होने के बाद हर कोई जानकर हैरान है कि गरीबों के बच्चों के नाम पर किस तरह अपनी ब्रांडिंग की गई।
पटना । गणितज्ञ आनंद का सुपर 30 विवाद में फंस चुका है। सुपर 30 में छात्रों को सुपर बनाने के लिए कैसे-कैसे झूठ और धोखे का सहारा लिया जाता है, उसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। एक गरीब बच्चे के दर्द को बेचकर सुपर 30 के आनंद तो पूरी दुनिया के लिए महान बन गए। लेकिन उसे किस तरह दुत्कार कर भगाने के बाद फिर उसे पोस्टर ब्वॉय भी बना दिया। यहां आपको ये भी बता दें सुपर 30 के नाम पर यहां रामानुजम क्‍लासेज चलती है, ि‍जिसके ि‍लिए आनंंद मोटी फीसद वसूलते हैं। आइये जानते हैं किस तरह होता है सुपर खेल जानिए….
अंडा बेचने वाले के बच्चे को भगाया फिर बना दिया दिया पोस्टर ब्वॉय
नालंदा के एक गरीब अंडा बेचने वाले का बच्चा जब सुपर 30 में एडमिशन लेने आया तो उसे पढ़ने में कमजोर बताकर रामानुजम क्लासेज में पढ़ने को मजबूर किया गया, लेकिन जब उसी बच्चे ने घर पर खुद से मेहनत की और आइआइटी क्वालिफाई कर गया तो उसकी गरीबी का दर्द बेचने के लिए आनंद कुमार ने उसे वापस बुलाया और उसे पोस्टर ब्वॉय बना दिया। फिर जब इस बच्चे का 2017 में हैंडिकेप कैटेगरी में 73 वां रैंक आया तो उसे अॉल इंडिया में 73 वां बताकर वाहवाही लूटी। नालंदा के उस अंडा बेचने वाले के बेटे अरबाज की दर्दनाक कहानी ने आनंद को दुनिया में हीरो बना दिया लेकिन अब इस कहानी की सच्चाई सामने आई है। अरबाज सुपर 30 में 30 सेकेंड भी नहीं गया। जब वह सुपर 30 के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया तो उसे भगा दिया गया। वह घर आकर खुद से तैयारी करने लगा। किसी को विश्वास नहीं था कि अरबाज जेईई एडवांस मेंस में, फिर एडवांस में भी क्वालिफाई कर जाएगा। जब उसका रिजल्ट आया तो आनंद खुद उसके पास आए और उसे लेकर आए फिर उसे पोस्टर ब्वॉय बना दिया। आनंद कुमार ने इस साल दावा किया कि जेईई की परीक्षा में इस बार 30 में से 26 छात्रों ने ही सफलता हासिल की है। लेकिन इसका सच तब उजागर हुआ जब एक स्टूडेंट ने बताया कि इस बार 30 में से 22 छात्रों को ही आनंद कुमार ने पढ़ाया है, जिसमें से मात्र तीन ही रेगुलर स्टूडेंट्स आईआईटी क्वालिफाई कर सके हैं। इन तीनों के नाम हैं-अनुपम, गगन और ओनरजीत। इनमें से दो स्टूडेंट्स कोटा में रहकर पढ़ रहे थे जिन्हें आनंद ने अपना स्टूडेंट बता दिया। कहा जाता है कि साइकिल पर घूम-घूमकर आनंद कुमार ने पापड़ बेचकर पढा़ई की और आज गरीबों के मसीहा बनकर बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं। ये सच है कि आनंद ने खुद गरीबी देखी है। बहुत कष्ट झेला है। उनकी विद्वता पर कोई शक नहीं लेकिन सुपर 30 के बहाने उन्होंने जो गरीबों को धोखा देने का काम किया है वो सही नहीं। बड़ा सवाल है कि बीते हर साल उनके भाई, मां, पत्नी और भाई की पत्नी करोड़ों की संपत्ति कैसे खरीद रहे हैं? आज उनकी मां के पास 22 प्लॉट हैं। क्या गरीब बच्चों को बिना फीस के पढ़ाकर करोड़ों की संपत्ति बन गई? कैसे..
केबीसी की हॉट सीट से कहा था-गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ाते हैं
पूरी दुनिया में गरीब बच्चों के लिए मसीहा माने जाने वाले आनंद कुमार गरीबों को धोखा दे रहे हैं। ये बस अपनी ब्रांडिंग के लिए उन्होंने दिखावा किया और झूठ-फरेब कर शोहरत हासिल कर ली। किसी ने कभी ये जानने की कोशिश नहीं की कि रामानुजम क्लासेज और सुपर 30 का क्या घालमेल है? केबीसी की हॉट सीट पर पहुंचे आनंद ने अमिताभ बच्चन को बताया था कि गरीब परिवार के बच्चो को ही सुपर 30 में पढ़ाते हैं।लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। वह बच्चों का एंट्रेंस के जरिए एडमिशन लेते हैं फिर उनके भाई प्रणव बच्चों की आर्थिक स्थिति की पड़ताल करते हैं। लेकिन 2015 में उन्होंने एेसे स्टूडेंट्स को सुपर हीरो बता दिया जो पटना के फिट जी में पढ़ते थे। आनंद सुपर 30 में पढ़ने वाले बच्चों को अपने पास रखकर फ्री में खाना-पढ़ाई का दावार करते हैं जबकि कई स्टूडेंट्स एेसे मिले जिन्हें आनंद ने अपना स्टूडेंट बताया लेकिन उन्होंने फिटजी में पढ़ाई की थी। जब स्टूडेंट्स ने फिटजी में पढ़ाई की तो वो गरीब कैसे हुए और सुपर 30 के कैसे हो गए?
सुपर 30 का ये है सच….
सुपर 30 के नाम पर रामानुजम क्लासेज चलाते हैं आनंद कुमार, जहां हजारों बच्चे पढ़ते हैं। किन-किन स्टूडेंट्स का कब और कैसे सुपर 30 में एडमिशन हुआ ये किसी को नहीं पता चलता है। रामानुजम में पढ़ने वाले बच्चों से हर साल करोड़ों की फीस वसूली की जाती है। रामानुजम में गरीबी कहीं नहीं दिखती। सवाल ये है कि सुपर 30 के स्टूडेंट्स की डिटेल मिले तो पता चले कि वे गरीब हैं या अमीर। इसका पता किसी को नहीं चल सका, ना चलेगा।

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