बिहार: बालिका गृह यौनशोषण की CBI जांच, विपक्ष ने सीएम नीतीश पर कसा तंज

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मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण मामले में विपक्ष के हंगामे के बाद आखिरकार नीतीश कुमार ने मामले की सीबीआइ जांच की अनुशंसा की है। इस पर राजनीति तेज हो गई है।
पटना । मुजफ्फरपुर बालिका गृह में बच्चियों से हुए यौनाचार के मामले में आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीबीआइ जांच की अनुशंसा की है जिसके बाद बिहार में सियासत चरम पर है। विपक्षी पार्टियां एक साथ मिलकर इस बारे में सत्तापक्ष पर हमलावर हैं और सीबीआइ जांच के बाद सीएम नीतीश कुमार से कहा है कि हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी। मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति पर लगे आरोपों के बाद बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने मांग की है कि सरकार मंत्री मंजू वर्मा को बर्खास्त करें। उन्होंने कहा कि ये इतना बड़ा मामला है और सीएम ने कार्रवाई करने में बहुत देर कर दी। खुद से नहीं, विरोधी दल की मांग के बाद नीतीश कुमार ने जांच की अनुशंसा की। नीतीश सरकार पूरी तरह निकम्मी सरकार है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सीबीआइ जांच की अनुशंसा पर कांग्रेस विधायक अवधेश सिंह ने कहा कि सरकार पर ही सरकार के लोगों को विश्वास नहीं है। सरकार के मंत्री के नाम आने के कारण ही सीबीआइ जांच की अनुशंसा करने में देर लगी। विपक्ष के दबाव पर सरकार ने की जांच की अनुशंसा। वहीं जांच की अनुशंसा के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि विपक्षी पार्टियों ने पहले सृजन घोटाला और अब मुजफ्फरपुर मामले पर सीबीआइ की जांच की मांग की है। अव वे आइआरसीटीसी मामले में सीबीआइ पर इल्जाम नहीं लगा सकते। सीबीआइ की जांच की अनुशंसा करने पर उन्होंने सीएम नीतीश कुमार को बधाई दी। विधान परिषद में डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कहा कि राजद-कांग्रेस कोर्ट की मॉनिटरिंग की बात कर रहे हैं, हम मॉनिटरिंग के लिए तैयार हैं। आप कोर्ट में अपील कीजिए, यह राजद-कांग्रेस की सरकार नहीं है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है कि इस मामले में मुजफ्फरपुर के स्थानीय मंत्री को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होने पूछा कि स्थानीय मंत्री कौन हैं? जिन्हें बच्चियां पेट वाले अंकल कहती थीं, जिनका नाम आ रहा है, वो कौन हैं? ये उजागर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद एक ही है कि बच्चियों के साथ न्याय हो। तेजस्वी ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। हमलोग मुजफ्फरपुर गए थे। वहां की स्थिति देखकर कई बातें छन के बाहर आई हैं। इतने दिन से जांच चल रही थी और सीएम को पता नहीं कि दोषी कौन-कौन हैं? इस मामले में सुशील मोदी के चहेते लोगों का नाम आ रहा है। सरकार उन्हें बचा रही है। वहीं खुद और पति पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री मंजू वर्मा ने कहा कि मेरे पति वहां एक बार नागरिक अभिनंदन समारोह में ही गए थे। उन्होंने लगे आरोप पर कहा कि सीडीपीओ की पत्नी झूठा आरोप लगा रही है। मेरे पति वहां कभी अकेले नहीं गए थे। अपने पति पर हुई कार्रवाई के कारण वह झूठा आरोप लगा रही है। सीबीआइ जांच की अनुशंसा पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानन्द सिंह ने कहा कि ये जनमानस की मांग थी और बीजेपी के घालमेल के कारण नीतीश कुमार ने अब जांच का निर्णय लिया है। वहीं सीपीआइएमएल के विधायकों ने मांगा समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा से इस्तीफे की मांग की और इसके साथ ही उनके पति की गिरफ्तारी की भी मांग की। सीएम के मुजफ्फरपुर मामले में सीबीआइ की जांच की अनुसंशा पर सीपीआइ ने तंज कसते हुए कहा कि विरोधियों के दबाव के बाद मुख्यमंत्री ने इस मामले में सीबीआइ जांच का निर्णय लिया है। विधान परिषद में विरोधी दल के सचेतक सुबोध राय ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गिरिराज सिंह लगातार मुजफ्फरपुर की यात्रा पर रहते थे, कहीं वो भी तो इसमें शामिल नहीं हैं। आशंका है कि वे बालिका गृह भी खूब जाते थे। जरूरत है कि सभी की टीआई परेड कराई जाए, ताकि असलियत का पता चल सके। सीबीआइ को सभी बिंदु पर जांच करने की जरूरत है। वहीं जदयू नेता नीरज कुमार ने कहा कि सीडीपीओ की पत्नी जो आरोप लगा रही हैं उनके पास अगल कोई सबूत है तो वो पुलिस को दें, इस तरह किसी पर अनर्गल आरोप नहीं लगाएं। उन्होंने कहा कि सरकार ने मुजफ्फरपुर मामले की सीबीआइ जांच का निर्णय लिया है अगर किसी के पास सबूत हो तो वे कोर्ट जाएं। पुलिस प्रशासन को अपना काम करने दें। केवल आरोप लगाने से काम नहीं चलेगा।

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