कुशवाहा के बाद अब पासवान ने दी धमकी, बढ़ सकती हैं भाजपा की मुश्किलें

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रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा के बाद अब चिराग पासवान ने जस्टिस एके गोयल की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए एनडीए सरकार को धमकी दी है। इससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
पटना । लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए के घटक दलों में अलग-अलग मुद्दों को लेकर अपनी बात रखने और धमकी देने का सिलसिला जारी है, जिससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पहले रालोसपा सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ बगावती तेवर दिखा रहे हैं तो अब लोजपा ने भी अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। लोजपा की तरफ से पार्टी के सुप्रीमो रामविलास पासवान के पुत्र सह जमुई से पार्टी के सांसद चिराग पासवान ने इशारों इशारों में कहा गया है कि उन्होंने भाजपा को समर्थन मुद्दों के आधार पर दिया है। उन्होंने जस्टिस एके गोयल को एनजीटी का प्रमुख नियुक्त किए जाने पर अपनी आपत्ति जताई है। दरअसल सु्प्रीम कोर्ट की जस्टिस एके गोयल की बेंच ने ही वह फैसला सुनाया था, जिसमें कहा गया था कि एससी-एसटी एक्ट में बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी। अब लोजपा उनकी नियुक्ति का विरोध करते हुए कह रही है कि एनजीटी के अध्यक्ष एके गोयल को बर्खास्त किया जाना चाहिए। चिराग पासवान का कहना है कि गोयल सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ का हिस्सा थे, जिसने दलितों और आदिवासियों पर अत्याचारों को रोकने के लिए बने कानून के प्रावधानों को कथित तौर पर कमजोर किया था। एेसे में गोयल को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए और एससी-एसटी (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के वास्तविक प्रावधानों को बहाल किया जाना चाहिए। चिराग ने धमकी भरे लहजे में कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो नौ अगस्त को दलित संगठनों का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन दो अप्रैल को हुए आंदोलन से भी ज्यादा हो सकता है। इसमें खुद लोजपा भी हिस्सा ले सकती है। बता देंं कि दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान हुए प्रदर्शन देश के कई स्थानों पर हिंसक हो गए थे। इनमें कई लोगों की मौत हो गई थी और संपत्ति को भी काफी नुकसान हुआ था। चिराग पासवान ने कहा कि शीर्ष कोर्ट से सेवानिवृत्त होने के बाद गोयल को एनजीटी का अध्यक्ष नियुक्त करने से गलत संदेश गया है और इससे दलित समुदाय नाराज है। लोजपा नेता ने कहा कि दलित संगठनों को शांत करने के लिए सरकार को नौ अगस्त से पहले संसद में नया विधेयक लाकर या अध्यादेश के जरिए कानून के वास्तविक प्रावधानों को बहाल करने के लिए कदम उठाना चाहिए। चिराग पासवान ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि एससी-एसटी एक्ट मामले में ऑर्डिनेंस लाया जाए। लेकिन अब शायद ये हो नहीं सकता। इसलिए हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार सात अगस्त को इसे बिल के तौर पर पेश करे और पुराने कानून को लागू करे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो नौ अगस्त को होने वाला दलितों का आंदोलन 2 अप्रैल से ज्यादा हिंसक हो सकता है।

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