बुराड़ी कांड: भाटिया परिवार से जुड़े 50 लोगों के दिमाग खंगालेगी पुलिस

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बुराड़ी के संत नगर इलाके में बीती 1 जुलाई को भाटिया परिवार के 11 सदस्यों की मौत के रहस्य से एक माह बीतने के बाद भी पर्दा नहीं उठ सका है। क्राइम ब्रांच की सिफारिश पर अब ‘साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी’ की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इसके लिए भाटिया परिवार से जुड़े 50 लोगों के दिमाग खंगाले जाएंगे। यह जानकारी जांच से जुड़े ज्वाइंट कमिश्नर आलोक कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि तीन विशेषज्ञों के एक पैनल ने घटना से संबंधित दस्तावेजों के अध्ययन के साथ इसकी शुरुआत कर दी है। ‘साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी’ आत्महत्याओं की जांच करने का एक तरीका है। इसमें मृतक के परिजनों, दोस्तों, जानने वालों और अगर उसका इलाज चल रहा है तो चिकित्सकों से उसके बारे में बात कर मानसिकता का विश्लेषण किया जाता है।
50 लोगों से 150 सवाल: जांच में यह बात सामने आई है कि ललित को मृत्यु के बाद भी अपने पिता को देखने और उनसे बात करने का भ्रम था। इस आधार पर ही यह कहा गया कि ललित के साथ पूरा परिवार साझा मनोविकृति (शेयर्ड साइकोटिक डिसऑर्डर) का शिकार था। इसकी जांच के लिए ही ‘साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी’ की जरूरत महसूस हुई थी। इसके लिए भाटिया परिवार के 50 करीबी जानकारों की सूची तैयार की गई है, जिनसे उनके व्यवहार व आचार-विहार को लेकर करीब 150 सवाल पूछे जाएंगे।
बाहर से आकर किसी ने जान ली
कारण : परिवार की मुखिया नारायणी देवी फर्श पर मृत मिली थीं। नारायणी देवी की गर्दन पर मिले निशान से संकेत मिला कि उन्हें जबरन बांधा गया था। अन्य मृतकों के बंधे हुए हाथ व बंद की गई आंखों के कारण पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया
स्थिति : 11 शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि मौत लटकने से हुई है। ऐसे में हत्या की जांच जारी है।
धार्मिक अनुष्ठान गलत हो गया
कारण : घर से बरामद 11 नोटबुक्स में उनके एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने का पता चला। ललित अपने मृत पिता से बात करके विशेष शक्तियों का आह्वान कर रहा था। नोट्स की लिखावट मृतकों में से कुछ से मेल खाती है।
स्थिति: जांच के दौरान इसकी सर्वाधिक संभावना जताई गई। पुलिस वर्तमान में इसी पर काम कर रही है।
किसी बाबा या तांत्रिक के प्रभाव में
कारण : नोटबुक्स में लिखी सामग्री ने पुलिस को यह भी सोचने को मजबूर किया है कि ऐसा किसी बाबा या तांत्रिक के प्रभाव में किया गया हो।
स्थिति: अब तक, पुलिस किसी बाबा या तांत्रिक को इस मामले से नहीं जोड़ पाई है। यह अनुष्ठान वर्ष 2007 से चल रहा था। यह संभावना कम ही है कि परिवार को इतने लंबे समय तक बाहरी व्यक्ति द्वारा निर्देशित किया जा रहा था।
फांसी से पहले जहर दिया
कारण : परिवार ने फांसी पर लटकने से पहले खाना बाहर से मंगाकर खाया था।
स्थिति : मृत लोगों के विसरा के नमूने फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं जिससे यह पता चल सके कि कहीं उनमें जहर का अंश तो नहीं है। रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
लटकने से पहले दूसरों को मारा
कारण: पुलिस को शक है कि घर के एक या दो सदस्यों ने पहले दूसरों को लटकाया, फिर खुद जान दी। परिवार के दो सदस्यों के हाथ भी पूरी तरह बंधे नहीं थे।
स्थिति: सभी की मौत लटकने की वजह से होने की पुष्टि होने के बाद भी पुलिस इस संभावना की जांच कर रही है।

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