महंगाई थामने को लेकर RBI ले सकता है बड़ा फैसला, बढ़ सकती है ब्याज दर!

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खुदरा महंगाई में लगातार इजाफे को देखते हुए रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति लगातार दूसरी तिमाही में नीतिगत दरों में इजाफा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोमवार से शुरू हुई समिति की बैठक में एक बार फिर रेपो रेट को बढ़ाने पर फैसला हो सकता है। आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) नीतिगत ब्याज दरों को लेकर 1 अगस्त को फैसला करेगी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि खुदरा महंगाई के अनुमान से ज्यादा होने और थोक महंगाई में इजाफे के कारण आरबीआई पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव है। उनका मानना है कि जून में आरबीआई की मौद्रिक समिति की बैठक के बाद से मुद्रास्फीति को लेकर परिदृश्य लगातार खराब हो रहा है। साथ ही केंद्रीय बैंक ज्यादा मुद्रास्फीति के जोखिम को लेकर लगातार आगाह भी करता रहा है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव और कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी से भी महंगाई और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में केंद्रीय बैंक अपने रेपो रेट में बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है। ग्लोबल फाइनेंस सर्विस कंपनी डीबीएस की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी नीतिगत बैठक में आरबीआई के ब्याज दरों में इजाफे की उम्मीद है। डीबीएस की अर्थशास्त्री राधिका राव ने बताया कि हम वित्त वर्ष 2018-19 में नीतिगत ब्याज दरों में 50 बेसिस प्वाइंट के इजाफे की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में मुमकिन है कि आरबीआई एक बार फिर ब्याज दरों में एक चौथाई की बढ़ोतरी करे। उन्होंने कहा कि इससे पहले जून में पेश अपनी पॉलिसी में आरबीआई ने कहा था कि भविष्य में ब्याज दर बढ़ाने का फैसला कई आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
पांच कारक डालेंगे फैसले पर असर:-
-थोक महंगाई चार साल में सबसे ज्यादा
थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति जून में 5.77% पहुंच गई, जो चार साल में सर्वाधिक है। मुख्य रूप से सब्जियों और ईंधन के महंगा होने से मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा है। मई में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 4.43% और 2017 के जून में 0.90% थी।
-एमएसपी बढ़ाने का बोझ
सरकार ने फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) करीब डेढ़ गुना बढ़ा दिया है, जिससे खुदरा महंगाई बढ़ने की आशंका है। आर्थिक सलाहकार एजेंसी ऐलारा कैप्टिल की रिपोर्ट बताती है कि अगर पिछले वर्ष के स्तर पर ही खरीद की जाती है तो खुदरा महंगाई की दर में 57 आधार अंकों की (0.57 फीसद) बढ़ोतरी हो सकती है।
-तेल कीमतों में इजाफा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नीचे आई हैं, लेकिन अब भी यह काफी ऊंचाई पर बनी हुई हैं। पिछले माह के 80 डॉलर प्रति बैरल के मुकाबले कच्चे तेल की कीमतें 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं। इससे महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास की गति धीमी होने की आशंका है।
-रुपये में गिरावट का सिलसिला
डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोर होती स्थिति का असर देश के आयात तंत्र पर पड़ेगा। ऐसे में बाहर से सामान मंगाने के लिए ज्यादा मूल्य चुकाना होगा, जिसका असर कीमतों पर पड़ेगा और एक बार फिर महंगाई पर दबाव आएगा। सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 68.67 तक पहुंच गया है।
-मानसून की बारिश में कमी
इस मानसून में कई राज्यों में अब तक औसत से कम बारिश हुई है। करीब 10 राज्यों ने अब तक कम बारिश का आंकड़ा दिखाया है। इससे किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा। साथ ही पैदावार भी प्रभावित हो सकती है।

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