जासूसी के आरोप के बाद केन्द्र ने वापस लिया ‘सोशल मीडिया’ हब का प्लान

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केन्द्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में यह साफ कर दिया कि वह सोशल मीडिया हब बनाने की अपनी योजना को वापस ले रही है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि यह नागरिकों की सोशल मीडिया की उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखने का एक औजार बन जाएगा। अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि केन्द्र ऐसे हब को बनाए जाने का नोटिफिकेशन वापस ले रहा है ताकि वह इस मुद्दे पर अपनी नीति की पूरी समीक्षा कर सके। सोशल मीडिया हब बनाने के प्रस्ताव को तृणमूल कांग्रेस के विधायक मोहुआ मोइत्रा ने चुनौती दी थी। उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि इस टूल जरिए उन लोगों पर 360 डिग्री तक निगरानी रखी जाएगी जो सोशल मीडिया पर महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपना विरोध करते हैं। जून के महीने में शीर्ष अदालत ने मोइत्रा की तरफ से केन्द्र के उस फैसले को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई को तैयार हुई थी, जिसमें यह कहा गया था कि केन्द्र के सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब (एसएमसीएच) सोशल मीडिया की गतिविधियों की जासूसी का एक औजार है और यह निजता का उल्लंघन है। हालांकि, सरकार ने दलील दी थी कि इससे सरकार को उनके कार्यक्रमों के बारे में जनता की राय का पता चलेगा और कई योजनाओं को लेकर में इससे मदद मिलेगी। इसमें यह दावा किया गया था कि इसके जरिए लोगों में राष्ट्रीयता की भावना भरी जाएगी और वैश्विक स्तर पर भारत की छवि नुकसान पहुंचाने से रोका जाएगा।

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