विजय माल्या के किंगफिशर ने दिया झटका तो जेट एयरवेज की इमर्जेंसी फंडिंग की मांग पर SBI ने रख दीं शर्तें

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क्या किंगफिशर एयरलाइन ने भी जेट एयरवेज की मुश्किल बढ़ा दी है? लग तो ऐसा रहा है कि विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइन बैंकों का कर्ज चुकाने में आनाकानी नहीं करती तो आज नरेश गोयल की जेट एयरवेज को शायद यह दिन देखना नहीं पड़ता। दरअसल, वित्तीय संकट का सामना कर रही जेट एयरवेज ने इमर्जेंसी फंडिंग के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से मदद मांगी तो किंगफिशर एयरलाइंस के मामले में भारी नुकसान उठा चुके SBI ने जेट से कर्ज के अधिक अधिक कोलैटरल देने के साथ ही भविष्य की योजनाओं और कैश फ्लो की स्थिति के बारे में जानकारी मांग दी। बैंक के सूत्रों ने बताया, ‘हमारी जेट एयरवेज के मैनेजमेंट के साथ मीटिंग हुई है। उन्होंने हमसे लिक्विडिटी के लिए मदद मांगी है। उन्हें और कर्ज दिया जा सकता है लेकिन इस बारे में अंतिम फैसला उनकी ओर से दी जाने वाली योजना पर निर्भर करेगा। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनी हिस्सेदारी बेचेगी या किसी स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप के जरिए फंड लगाया जाएगा। हम अपनी रकम को सुरक्षित रखना चाहते हैं। अधिक कर्ज देना एक्सक्लूसिव गारंटी और कुछ कैश फ्लो पर अधिकार पर निर्भर करेगा। बैंक के लिए सतर्कता के साथ चलना बहुत महत्वपूर्ण है।’ इस बारे में जेट एयरवेज को भेजी गई ईमेल का जवाब नहीं मिला।

सूत्रों ने बताया कि जेट एयरवेज के सीईओ विनय दूबे ने व्यक्तिगत तौर पर SBI के टॉप मैनेजमेंट के साथ मिलकर मदद मांगी है। हवाई किराया घटने, कम मार्जिन और फ्यूल की बढ़ती कॉस्ट के कारण मार्केट शेयर के लिहाज से देश की सबसे बड़ी एयरलाइन जेट एयरवेज का मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष के पहली तिमाही में कंपनी को लॉस होने का अनुमान है।

एक अन्य सूत्र ने बताया, ‘SBI को भविष्य के कैश फ्लो, फ्यूल और एयरक्राफ्ट लीज के लिए भुगतान को लेकर एक मजबूत योजना की जरूरत होगी। निश्चित तौर पर रिस्क पर आधारित सामान्य मानक लागू होंगे और कर्ज पर ब्याज अधिक होगा।’SBI के चेयरमैन ने हाल ही में कहा था कि बैंक ने जेट एयरवेज को स्ट्रेस्ड लोन के तहत निगरानी में रखा है। बैंक का जेट एयरवेज पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है।

हालांकि, जेट एयरवेज का कहना है कि SBI के साथ उसका अकाउंट स्टैंडर्ड है और इसे किसी निगरानी में नहीं रखा गया है। जेट ने पहले क्वॉर्टर के रिजल्ट पर विचार करने के लिए अपनी बोर्ड मीटिंग टाल दी थी। इसके बाद कंपनी के शेयर की कीमत में शुक्रवार को भारी गिरावट आई थी। कंपनी के बोर्ड की ऑडिट कमिटी के चेयरमैन रिटायर हो गए हैं।

मार्च के अंत तक जेट एयरवेज का नेट डेट 8,150 करोड़ रुपये था। वर्ष के लिए कंपनी की रीपमेंट 3,000 करोड़ रुपये से अधिक (2,121 करोड़ रुपये के प्रिंसिपल का भुगतान और कम से कम 850 करोड़ रुपये का इंट्रेस्ट) होगी। इसमें कंपनी के विमानों के लिए लीज रेंटल शामिल नहीं है। लीज रेंटल 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है।

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