पुणे के Cosmos Bank में सेंधमारी, हैकर्स ने चुराए 92 करोड़ रुपये

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पुणे के कॉसमॉस बैंक के सर्वर में हैकर्स ने सेंधमारी कर 92.42 करोड़ रुपये चुराने का सनसनीखेज़ मामला सामने आया है. बेहद फिल्मी स्टाइल में की गई यह अब तक की सबसे बड़ी और बेहद अनोखी डीजिटल डकैती है. हैकर्स ने बस एक कमरे में बैठकर कॉसमॉस बैंक के हेड ऑफिस का सर्वर हैक किया और 94 करोड़ रुपये चुरा लिए. हैकर्स ने बस एक कमरे में बैठे-बैठे कॉसमॉस बैंक के हेड ऑफिस का सर्वर हैक किया और बैंक से 94 करोड़ रुपये गायब हो गए. जांच में पता चला कि 21 देशों के अलग-अलग शहरों के एटीएम से ये 94 करोड़ रुपये निकाले गए हैं.

देश के इतिहास में हुई इस सबसे बड़ी बैंक डकैती को लेकर कॉसमॉस बैंक के चेयरमैन मिलिंद काले बताते हैं, ‘हैकर्स ने हमारे सर्वर को हैक कर 94 करोड़ों रुपये निकाल लिए. हमारी जांच में पता चला कि 21 देशों से ये पैसे निकाले गए हैं.’ हालांकि इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी ग्राहकों के पैसे सुरक्षित हैं.

वहीं जानकारों का मानना है कि इस तरह की डीजिटल डकैती अपने-आप में अनोखी है. जब भी किसी बैंक के सर्वर में सेंधमारी होती है, तो बैंक के आला अधिकारियों को तुरंत इसकी जानकारी लग जाती है. लेकिन इस मामले में बैंक के अधिकारियों को लंबे समय तक भनक तक नहीं लगी.

हैकर्स ने पहले 11 अगस्त को बैंक के सर्वर में सेंध लगाकर 78 करोड़ रुपये चुराए. इसके बाद भी जब उनकी चोरी पकड़ी नहीं गई तो हैकर्स की हिम्मत बढ़ गई और उन्होंने 13 अगस्त को एक बार फिर सर्वर में संध लगाते हुए 14 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए.

साइबर क्राइम एक्सपर्ट प्रशांत माली कहते हैं, ‘बैंक के सर्वर में सेंधमारी कर ATM को हैक करके बारह हजार ट्रांजैक्शन के जरिये लगभग 94.2 करोड़ रुपये निकाले गए. यह अपने आप में चौंकाने वाली बात है कि इतनी बार ट्रांजैक्शन होने के बावजूद बैंक अधिकारी हरकत में क्यों नहीं आए.’ इसके साथ ही वह कहते हैं कि इस घटना से बैंक के ग्राहकों को डरने की जरूरत नहीं है. अगर पुलिस ने वक्त रहते उस पैसे को फ्रीज़ कर दिया है और वह पैसा भारत में रह गया है तो उसके वापस मिलने की संभावना काफी मजबूत है.

बैंक की शिकायत पर पुलिस ने इस संबंध में अज्ञात हैकर्स और एएलएम ट्रेडिंग लिमिटेड और हैंगसैंग बैंक के खिलाफ केस दर्ज किया है. पुलिस जांच में पता चला है कि बैंक से चुराए गए 94 करोड़ में से 78 करोड़ रुपये हॉन्ग-कॉन्ग समेत दूसरे विदेशी शहरों से निकाले गए हैं, जबकि बाकी के 14 करोड़ भारत में ही अलग-अलग शहरों के एटीएम से निकाले गए.

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