2 मौतों के बाद पटना शेल्टर होम चलाने वाली पूर्व मॉडल अरेस्ट, मिली रिमांड

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पटना
बिहार के पटना में बीमार महिलाओं के लिए चलाए जाने वाले एक शेल्टर होम में दो महिलाओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों को पुलिस ने पूछताछ के लिए तीन दिनों की रिमांड पर लिया है। पुलिस ने शेल्टर होम चलाने वाली एनजीओ अनुमाया के निदेशक चिरंतन कुमार और कोषाध्यक्ष मनीषा दयाल को सोमवार को गिरफ्तार किया था। दोनों को न्यायिक दंडाधिकारी अभिजीत कुमार की अदालत में पेश किया। पुलिस ने आरोपियों की तीन दिन की रिमांड मांगी थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। दूसरी ओर दोनों युवतियों का इलाज करने वाले डॉक्टर और नर्स फरार हैं। पुलिस ने सोमवार देर रात तक चिरंतन और मनीषा से पूछताछ की। पूर्व मॉडल मनीषा की कई नेताओं के साथ तस्वीरें वायरल होने के बाद विवाद उठा था कि उनकी पावरफुल लोगों तक पहुंच है। फोटो वायरल होने पर जेडीयू नेता श्याम रजक ने सफाई दी है। श्याम रजक का कहना है कि उन्होंने शेल्टर होम के एक कार्यक्रम में बतौर अतिथि शिरकत की थी।

महिला सशक्तीकरण वाली बताती हैं मनीषा दयाल
शेल्टर होम मामले की मुख्य आरोपी बताई जा रही मनीषा दयाल खुद को एनजीओ अनुमाया ह्यूमन रिसॉर्स फाउंडेशन का डायरेक्टर बताती हैं। वह मॉडल रह चुकी हैं। उनकी कई नेताओं के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल हो रही है। वह सोशल मीडिया पर काफी ऐक्टिव हैं। अक्सर वह अलग-अलग प्रोग्राम की तस्वीर अपलोड करती रहती हैं। ज्यादा लोग उन्हें मिलि के नाम से जानते हैं। वह अपनी पोस्ट के जरिए दावा करती हैं कि उन्होंने महिला सशक्तीकरण के लिए कई काम किए हैं। हाल ही में उन्होंने तीज मेला का आयोजन किया था, जिसमें महिलाओं को तीज क्वीन और मिस प्रिंसेज घोषित किया गया था।

क्या है पूरा मामला
बता दें कि पटना शेल्टर होम में एक लड़की समेत दो महिलाएं 10-11 अगस्त की शाम गंभीर रूप से बीमार पड़ गई थीं, जिन्हें इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। लड़की की उम्र 17 और महिला की उम्र 40 साल थी। शेल्टर होम का कहना है कि दोनों को डायरिया और तेज बुखार था। वहीं अस्पताल का कहना था कि दोनों युवतियां शुक्रवार रात मरी हालत में लाई गई थीं। पुलिस को इसकी जानकारी 36 घंटे बाद दी गई।

अस्पताल के सूत्रों का दावा है कि दोनों महिलाओं का पोस्टमॉर्टम दो पुलिस अवर निरीक्षक की उपस्थिति में कराया गया था लेकिन संबंधित थानों को सूचित किए जाने में उनकी विफलता को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने गंभीरतापूर्वक लिया है। बिहार के समाज कल्याण विभाग के निदेशक राजकुमार का कहना है कि पीएमसीएच के अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि दोनों महिलाओं को मृत लाया गया था लेकिन महिलाओं के इलाज के वक्त अस्पताल में मौजूद विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि उनकी मौत इलाज के दौरान हुई थी।

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