बकरीद आज, राष्ट्रपति व पीएम ने दी बधाई, जानें क्यों दी जाती है बकरे की कुर्बानी

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देश में सभी लोग आज बुधवार को बकरीद मना रहे हैं। सुबह दिल्ली की जामा मस्जिद में ईद की नमाज अदा की गई। इस अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज नेताओं ने देशवासियों को बकरीद की शुभकामनाएं दी। राष्ट्रपति ने ट्विटर पर लिखा कि ईद-उल-जुहा के अवसर पर सभी देशवासियों विशेष रूप से हमारे मुस्लिम भाइयों और बहनों को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। इस विशेष दिन हम त्याग और बलिदान की भावना के प्रति अपना आदर व्यक्त करते हैं। आइए, अपने समावेशी समाज में एकता और भाइचारे के लिए मिलकर काम करें। ईद-उल-जुहा के अवसर पर सभी देशवासियों विशेषकर हमारे मुस्लिम भाइयों और बहनों को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।
इस विशेष दिन हम त्याग और बलिदान की भावना के प्रति अपना आदर व्यक्त करते हैं। आइए, अपने समावेशी समाज में एकता और भाइचारे के लिए मिलकर काम करें — राष्ट्रपति कोविन्द
आइये आपको बतातें हैं बकरीद क्यों मनाई जाती है.. दरअसल इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक हजरत इब्राहिम पैगंबर थे। वह हमेशा बुराई के खिलाफ लड़े, उनके जीने का मकसद लोगों की सेवा करना था। 90 साल की उम्र तक उनकी कोई संतान नहीं थी। उन्होने खुदा से इबादत की तब उन्हें संतान के रूप में बेटे इस्माईल की प्राप्ति हुई। उन्हें सपने में आदेश मिला कि खुदा की राह में कुर्बानी दो। उन्होंने कई जानवरों की कुर्बानी दी, इसके बावजूद भी उन्हें सपने आने बंद नहीं हुए। उनसे सपने आया कि तुम अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी दो। उन्होंने इसे खुदा का आदेश माना और अपने बेटे की कुर्बानी के लिए तैयार हो गए। ऐसा माना जाता है कि हजरत इब्राहिम को लगा कि कुर्बानी देते समय उनकी भावनाएं आड़े आ सकती हैं, इसलिए उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी। जब उन्होंने पट्टी खोली तो देखा कि मक्का के करीब मिना पर्वत की उस बलि वेदी पर उनका बेटा नहीं, बल्कि दुंबा था और उनका बेटा उनके सामने खड़ा था। विश्वास की इस परीक्षा के सम्मान में दुनियाभर के मुसलमान इस अवसर पर अल्लाह में अपनी आस्था दिखाने के लिए बकरे की कुर्बानी देते हैं।

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