मोहन भागवत के कार्यक्रम में राहुल-येचुरी को आमंत्रित कर सकता है आरएसएस

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अगले महीने संघ प्रमुख मोहन भागवत की तीन दिन की व्याख्यान श्रृंखला में शामिल होने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी सहित कई अन्य को न्योता दे सकता है। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के अनुसार सूत्रों ने बताया कि इस कदम का मकसद अलग-अलग विचारधारा के लोगों को कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करना है। उन्होंने बताया कि सूची अभी तैयार की जा रही है। व्याख्यान श्रृंखला में राहुल को आमंत्रित किए जाने के संकेत ऐसे समय पर मिले हैं जब आज ही आरएसएस ने अपनी तुलना इस्लामी कट्टरपंथी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से किए जाने पर कांग्रेस अध्यक्ष की आलोचना की है। सितंबर में होने वाली व्याख्यान श्रृंखला का ब्योरा देते हुए आरएसएस के प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा कि संघ पहली बार अपने प्रमुख मोहन भागवत की तीन दिन की व्याख्यान श्रृंखला आयोजित कर रहा है जिसका थीम होगा ‘भारत का भविष्य: आरएसएस के परिपेक्ष्य में। कुमार ने पत्रकारों को बताया, ”तीन दिन की व्याख्यान श्रृंखला में भागवतजी चुनिंदा लोगों को संबोधित करेंगे और उनसे मुखातिब होंगे। इसमें गणमान्य नागरिक हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम 17 सितंबर से 19 सितंबर तक विज्ञान भवन में आयोजित किया जाएगा। कुमार ने कहा कि देश भर के लोग आरएसएस के बारे में जानना चाहते हैं और इससे जुड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ”यह व्याख्यान श्रृंखला इस संदर्भ में आयोजित की जा रही है। सरसंघचालक मोहन भागवतजी राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न समकालीन मुद्दों पर संघ के विचार प्रस्तुत करेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या राहुल गांधी भी आमंत्रित किए जाएंगे, इस पर कुमार ने कहा कि सूची को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा, ”किसे आमंत्रित करना है या नहीं करना है, यह चुनना हमारा विशेषाधिकार है….लेकिन हर क्षेत्र के लोगों, जिसमें अलग-अलग राजनीतिक संगठनों, विचारधाराओं एवं धर्मों के लोग होंगे, को न्योता दिया जाएगा। इस साल जून में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आरएसएस के न्योते पर नागपुर स्थित संघ के मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत की थी, जिसके लिए पार्टी के नेताओं ने उनकी आलोचना की थी। राहुल ने अपने हालिया विदेश दौरे में भाजपा के वैचारिक मार्गदर्शक आरएसएस पर खूब हमले बोले थे। उन्होंने आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से की थी। उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि आरएसएस भारत की प्रकृति को बदलने की कोशिश कर रहा है और देश की संस्थाओं पर कब्जा कर रहा है। आरएसएस ने आज कहा कि राहुल संघ को नहीं समझ सकते, क्योंकि वह भारत को ही नहीं समझते।

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