आरके स्टूडियो बेचने के फैसले पर बोलीं करीना कपूर, ‘मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता’

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कपूर परिवार ने मशहूर आरके स्टूडियो बेचने का फैसला कर लिया है। 70 साल पहले बने इस ऐतिहासिक स्टूडियो में पिछले साल भीषण आग लग गई थी और इसका एक बड़ा हिस्सा जलकर तबाह हो गया था। जिसके बाद से ही स्टूडियो में शूटिंग होना कम हो गई। इन्हीं सब वजहों के चलते कपूर परिवार स्टूडियो को बेचना चाहता है। ऋषि कपूर का कहना है कि उनके लिए इसे बेचने का फैसला लेना आसान नहीं था उन्होंने दिल पर पत्थर रखकर ये फैसला किया है। इसी बीच करीना कपूर का भी बयान सामने आया है। एक इंटरव्यू में करीना ने कहा, राज कपूर द्वारा बनाए गए उस स्टूडियो से हमारी बहुत सारी यादें जुड़ी हैं। वहां की गलियों में हम बढ़े हुए हैं। हालांकि 4-5 दिन से मेरी तबियत ठीक नहीं थी तो इस बारे में मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं है। मैं पापा से चार-पांच दिन से मिली भी नहीं हूं। लेकिन मुझे लगता है परिवार जो भी फैसला किया होगा सोच समझकर ही किया होगा। अब यह मेरे पिता और उनके भाइयों पर है। अगर उन्होंने यही तय किया है तो यही सही। बता दें कि पिछले साल 16 सितंबर को स्टूडियो में ‘सुपर डांसर’ के सेट पर आग लग गयी थी जिससे उसका एक हिस्सा जल गया था। उस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ था। ऋषी कपूर ने स्टूडियो को आधुनिक टेक्नोलोजी के साथ फिर से तैयार कराने की इच्छा व्यक्त की थी। लेकिन उनके बड़े भाई रणधीर कपूर ने कहा कि यह व्यवहारिक नहीं था। रणधीर कपूर ने पीटीआई से कहा, हां, हमने आरके स्टूडियो को बेचने का फैसला किया है। यह बिक्री के लिए उपलब्ध है। स्टूडियो में आग लगने के बाद उसे फिर से बनाना व्यवहार्य नहीं था…इसे फिर से बनाना आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं था। आरके बैनर के तहत बनी फिल्मों में ‘आग’, ‘बरसात’, ‘आवारा’, ‘श्री 420’, ‘जिस देश में गंगा बहती है’, ‘मेरा नाम जोकर’, ‘बॉबी, ‘सत्यम शिव सुंदरम, ‘राम तेरी गंगा मैली आदि शामिल हैं। आरके बैनर के तले बनी आखिरी फिल्म ‘आ अब लौट चलें थीं’ जिसे ऋषि कपूर ने निर्देशित किया था। राजकपूर के 1988 में निधन के बाद उनके बड़े पुत्र रणधीर ने स्टूडियो का जिम्मा संभाला। बाद में राजकपूर के सबसे छोटे पुत्र राजीव कपूर ने ‘प्रेम ग्रंथ का निर्देशन किया।

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