फ्रांस में तैयार हुए देश को सिल्वर मेडल दिलाने वाले घोड़े, ये न सोते हैं न ही थकते हैं

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इंडोनेशिया में हो रहे एशियाई खेलों में भारतीय घुड़सवारों के लिए खास किस्म के घोड़े फ्रांस में तैयार किए गए। इन घोड़ों को एशियाड के लिए वहीं साधा गया। इन घोड़ों की खास बात यह है कि ये बमुश्किल आधा घंटा ही सोते हैं। थकान तो इन्हें मानो कभी होती ही नहीं । आठ से 14 वर्ष आयु के बीच के इन घोड़ों का योगदान देश के लिए सिल्वर मेडल लाने में घुड़सवारों से कम नहीं है। एशियन गेम्स में घुड़सवारी में सिल्वर मेडल जीतने वाले फहाद मिर्जा की जीत में उनके घोड़े मेडिकॉट का बड़ा योगदान है। आरवीसी के सवार जितेंद्र सिंह के लिए दलखानी नाम का घोड़ा तैयार किया गया। राकेश कुमार वेनीवेदी पर सवार हुए। इन सभी घोड़ों की आयु 14 वर्ष से कम है। ये फ्रांस में ही तैयार किए गए। होर्स ट्रेनर कर्नल मंगल सिंह बताते हैं कि ये ऐसे घोड़े हैं जो न थकते हैं और न सोते हैं। क्या यह वाकई सोता, लेटता या बैठता नहीं है? इस सवाल के जवाब में कर्नल मंगल बताते हैं कि चूंकि इन घोड़ों को जब कभी आप देखते हैं, वह खड़ा हुआ और जागृत अवस्था में ही दिखाई देता है। घोड़े को नींद बहुत कम आती है। वह दिनभर में मुश्किल से आधा घंटा ही गहरी नींद सो पाता है। इस दौरान कुछ पल वह लेट सकता है। घोड़े की नींद झपकियों में ही पूरी हो जाती है। यह घोड़े चौबीस घंटे खड़े रहकर भी थकते नहीं हैं और न ही थक कर गिरते हैं। प्रकृति ने उनके पैरों की रचना इस प्रकार से की है कि वे बिना जमीन पर लेटे नींद ले लेते हैं। थकान से बचने के लिए जब वे खड़े होते हैं तो चार में से कोई एक पैर थोड़ा ऊपर उठाकर रखते हैं। ऐसी स्थिति में शरीर का वजन तीसरे पैर पर होता है। बारी-बारी से वह अपने एक पैर को ऊपर रखकर थकान मिटा लेते हैं। कर्नल मंगल सिंह बताते हैं कि घोड़े की बनावट ही कुछ ऐसी होती है कि वह लंबे समय तक बैठ या लेट नहीं सकता। बैठने की स्थिति में शरीर का पूरा भार गर्दन और पेट के मध्य के भाग पर आ जाता है, जो उसके श्वसन तंत्र पर दबाव डालता है। उसे सांस लेने में मुश्किल होती है। घोड़ा जब चलता है तो उसकी गति में कुछ विशेषताएं देखी जा सकती हैं। पहली गति से वह जमीन पर एक समय में एक ही पैर रखता है, अगला पैर एक दिशा में तथा पिछला पैर दूसरी दिशा में एक साथ जमीन पर पड़ते हैं। जब तेज दौड़ता है तो चारों पैर हवा में उछलते दिखाई देते हैं। सेना में हॉफ ब्रीड घोड़े खासतौर पर पसंद किए जाते हैं। हॉफ ब्रीड किसी विदेशी और इंडियन नस्ल के संकर से तैयार होती है। दुनिया में घोड़ों की नस्लों को दो हिस्सों में बांट सकते हैं। पहला कोल्ड ब्लड, दूसरा वार्म ब्लड। वार्म और कोल्ड ब्लड के संकर से हाफ ब्रीड प्रजातियां तैयार होती हैं। सेना में हॉफ ब्रीड घोड़े ही होते हैं।
ट्रेनिंग का रोल
– घोड़ों की खास ट्रेनिंग और नस्ल का है घुड़सवारी में बड़ा रोल
– आरवीसी से जुड़े तीनों घुड़सवार फ्रांस में वहीं के घोड़ों के साथ ले रहे थे ट्रेनिंग
– सिविलियन फहाद मिर्जा ने ली चार साल तक जर्मनी में ट्रेनिंग
– 24 घंटे में बमुश्किल आधा घंटे ही सोते हैं यह घोड़े
ऐसे साधे जाते हैं घोड़े
घुड़सवारी प्रतिस्पर्धा में जाने वाले घोड़ों को सुबह व्यायाम कराया जाता है। इसमें वॉक, ट्रॉट और कैंटर होती हैं। घोड़े की एक्सरसाइज का सेशन 40 से 50 मिनट का होता है। उसके बाद घोड़े को पेट भरकर पानी पिलाया जाता है। फिर उसे दाना खिलाया जाता है। दोपहर में आराम के बाद फिर से दाना-पानी के बाद फिर एक्सरसाइज सेशन शुरू होता है जो करीब आधे घंटे तक चलता है।

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