कॉलेज में बैकबेंचर था ये शख्स, आज है देश का सबसे युवा अरबपति

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मोबाइल वॉलेट Paytm के फाउंडर विजय शेखर का नाम एक बार फिर से चर्चा में है. अरबपति निवेशक वारेन बफे की बर्कशायर हैथवे ने उनकी डिजिटल भुगतान कंपनी पेटीएम में 2,500 करोड़ रुपये का निवेश किया है. अरबपति वॉरेन बफे का इस फर्म में निवेश करना इसलिए भी खास है क्योंकि वह ज्यादातर इंटरनेट फर्मों में निवेश करने से कतराते रहे हैं. वारेन बफे का किसी भी भारतीय स्टार्टअप कंपनी में यह पहला निवेश है.

पेटीएम के फाउंडर और CEO (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) एक और पायदान ऊपर चढ़ गए हैं. हालांकि पेटीएम फाउंडर विजय शेखर की सफलता की कहानी भी कुछ कम दिलचस्प नहीं है. एक छोटे से शहर से आने वाले शर्मा 40 साल से कम उम्र के एकमात्र भारतीय अरबपति हैं. आइए जानते हैं उनके संघर्ष से सफलता के शिखर तक पहुंचने की कहानी.

विजय यूपी के अलीगढ़ के हरदुआगंज नाम के कस्बे में पले-बढ़े हैं. उनकी मां हाउसवाइफ और पिता स्कूल टीचर थे. उनकी स्कूलिंग हिंदी मीडियम में हुई.

शर्मा ने 14 साल की कम उम्र में ही 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी, इसलिए उन्हें इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेने के लिए इंतजार करना पड़ा. हिंदी मीडियम में पढ़ाई करने की वजह से अंग्रेजी में एंट्रेंस एग्जाम देना उनके लिए एक कठिन काम था लेकिन 1994 में उन्होंने एग्जाम पास कर दिखाया.

उनका दाखिला दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में तो हो गया लेकिन उनके लिए अब भी सबसे बड़ी समस्या उनकी कमजोर अंग्रेजी थी. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि कैसे कॉलेज में उनका अनुभव ‘तारे जमीन पर’ फिल्म के बच्चे वाला था जहां अक्षर समझ में नहीं आते थे और शब्द हवा में तैरते मालूम पड़ते थे. क्लासमेट्स के सामने उन्हें शर्मिंदगी होने लगी और वह बैकबेंचर्स में शामिल हो गए.

लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. अंग्रेजी सीखने के लिए वह एक दो किताबें एक साथ पढ़ने लगे. एक हिंदी में और एक अंग्रेजी में. एंटरटेनमेंट मैगजीन के साथ-साथ बिजनेस मैगजीन भी पढ़ने लगे.

लेकिन अब उनके सामने दूसरी चुनौती थी- आर्थिक स्थिति. IIM की फीस उस वक्त करीब 2-3 लाख थी, उनके पास इतने पैसे नहीं थे. उन्होंने तब खुद से वादा किया कि एक दिन वह IIM ग्रैजुएट्स को अपनी कंपनी में नौकरी देंगे.

उन्होंने एक इंटरव्यू में अपनी आर्थिक तंगहाली का जिक्र करते हुए बताया था, ‘कभी-कभी मेरे पास डिनर के भी पैसे नहीं होते थे. दो कप चाय से ही मेरा काम चल जाता था. 10 रुपए बचाने के लिए मैं बस लेने के बजाए पैदल ही चल लिया करता था.’

कॉलेज में रहते हुए ही विजय ने Indiasite.net (XS) नाम की एक वेबसाइट शुरू की और कुछ वर्षों के भीतर उसे एक यूएस इन्वेस्टर को बेच दिया. उस वक्त उनकी उम्र केवल 21 वर्ष थी.

हर सप्ताह उन्हें लाखों रुपए मिलने लग गए. यह उनका पहला प्रॉफिटेबल वेंचर था. कॉलेज में वीएसएस के नाम में मशहूर विजय के दोस्तों के लिए यह सब कुछ हैरान करने वाला था.

शर्मा ने 2011 में मोबाइल वॉलेट पेटीएम के साथ ही ई- कॉमर्स कारोबार पेटीएम मॉल और पेटीएम पेमेंट्स बैंक भी खड़ा किया. बिजनेस मैगजीन फोर्ब्स ने दुनिया के तमाम धनवानों की इस साल की लिस्ट में उनका नाम भी शामिल था. मोबाइल वॉलेट Paytm के संस्थापक विजय शेखर शर्मा (39) सबसे कम उम्र के भारतीय अरबपति भी हैं.

विजय कहते हैं, ‘यह मायने नहीं रखता है कि आप बड़े शहर से हैं या छोटे से कस्बे से. बिल्कुल भी नहीं, आपके अंदर बस गंभीरता होनी चाहिए.’

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