पुणे पुलिस का दावा, भीमा-कोरेगांव में भड़की हिंसा थी पूर्व नियोजित

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पुणे के भीमा-कोरेगांव में इस साल हुई हिंसा पूर्व नियोजित थी। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि भीमा-कोरेगांव की हिंसा सरकार को हटाने के इरादे से की गई थी और इस बात का पुलिस का बाद पुख्त सबूत है। पूरे जांच की निगरानी कर रहे पुणे के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि भीमा कोरेगांव में जो व्यापक हिंसा फैली थी उसकी तैयारी करीब आठ महीने पहले ही तैयार कर ली गई थी। पुलिस सूत्रों ने बताया- काफी बड़ी तादाद में कागजात और अन्य सबूतों के बाद हम पूरी तरह से आश्वस्त हैं कोर्ट में इस बात को साबित करने कर देंगी कि भीमा कोरेगांव हिसा पूर्व नियोजित थी और 31 दिसंबर को एल्गार परिषद इसका एक हिस्सा था। पुण से करीब 40 किलोमीटर दूर भीमा कोरेगांव में भड़की जातीय हिंसा की जांच में दो चीजें निकलकर सामने आई। एक जांच में माओवादियों की संलिप्तता का मामला सामने आया जबकि अन्य में राइटविंग कट्टरपंथिय हिन्दू की भूमिका सामने आई। एक जांच जिसे पुलिस की शहरी पुलिस की तरफ से की जा रही है उसमें पुणे में पिछले साल 31 दिसंबर हुए एल्गार परिषद कार्यक्रम के तार माओवादियों से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। जबकि, अन्य जांच जिसे पुणे की ग्रामीण पुलिस कर रही है उसमें समस्त हिन्दू अघाडी नेता मिलिंद एकबोटे, शिव छत्रपति प्रतिष्ठान संस्थापक संभाजी भिडे के खिलाफ 1 जनवरी को भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा भड़काने का केस दर्ज किया है।

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