जबरदस्त अभिनय से भरपूर है ‘गली गुलियां’

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साल 2016 में दीपेश जैन ने पहली बार एक फिल्म डायरेक्ट की जिसका नाम उन्होंने ‘इन द शैडोज’ रखा. यह फिल्म बहुत सारे फिल्म फेस्टिवल में गई और कई जगहों पर अलग-अलग तरह के अवार्ड भी जीते. आखिरकार उसे भारत में गली-गुलियां के नाम से रिलीज किया जा रहा है, मनोज बाजपेयी और नीरज कबि, इस फिल्म में मुख्य भूमिका में है. आइए जानते हैं आखिरकार कैसी बनी है यह फिल्म.

कहानी:
फिल्म की कहानी पुरानी दिल्ली की गलियों से शुरू होती है जहां एक इलेक्ट्रिशियन खुद्दूस (मनोज बाजपेयी) रहता है. उसके पड़ोस में हमेशा एक पिता (नीरज कबि) अपने बेटे (ओम सिंह) को बेरहमी मारता रहता है. जो बात खुद्दुस को बिलकुल पसंद नहीं आती है और वह किसी तरह से उस बच्चे की मदद करना चाहता है. वह समय-समय पर अपने दोस्त (रणवीर शोरी) की मदद भी लेता है जिसके साथ ही कहानी में कई सारे पहलू उजागर होते हैं, आखिरकार किन वजहों से वह बेरहम पिता अपने बेटे को मारता है और क्या इस हिंसा से खुद्दुस उस बालक को फ्री कर पाता है? अंततः क्या होता है यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

जानिए आखिर फिल्म को क्यों देख सकते हैं:
फिल्म की खूबी इसकी कहानी है जो कई परतों से होती हुई, अंततः एक सरप्राइज़ पर खत्म होती है. डायरेक्शन लाजवाब है और जिस तरह से दिल्ली की गलियों को दीपेश जैन ने दर्शाया है लगता ही नहीं कि यह उनकी डायरेक्टर के तौर पर पहली फिल्म है. फिल्म की सिनेमेटोग्राफी बढ़िया है और जिन्हें इस तरह की फिल्में पसंद है वह पूरी तरह से कहानी में खुद को लिप्त पाएंगे. उनका स्क्रीनप्ले काफी अच्छा लिखा गया है और परत-दर-परत जब चीजें खुलती है तो कहानी सोचने पर विवश करती है. कहीं-कहीं ड्रोन कैमरे का प्रयोग लाया गया है तो कभी-कभी लॉन्ग शॉट और प्रोजेक्ट में चीजें और निखर कर सामने आती है. मनोज बाजपेयी ने इलेक्ट्रिशियन के काम को बखूबी निभाया है और किरदार में पूरी तरह से लिप्त नजर आते हैं. इसी के साथ बेरहम पिता का किरदार नीरज कबि ने सराहनीय तरीके से निभाया है जिसकी वजह से शायद आप उनसे घृणा भी करने लगे. इस फिल्म में पहली बार ओम सिंह काम कर रहा है और असल जिंदगी में वह एक अनाथालय से लाया गया बच्चा है जिसे फिल्म में दीपेश जैन और मनोज बाजपेई ने काम करवाया है ओम सिंह काफी नेचुरल अभिनय करते हुए नजर आते हैं. रणवीर शोरी और शहाना गोस्वामी ने भी सहज अभिनय किया है.

कमज़ोर कड़ियां:
यह टिपिकल मसाला फिल्म नहीं है जिसकी वजह से शायद एक खास तरह की ऑडियंस ही इस फिल्म को देखना पसंद करेगी. साथ ही साथ बॉक्स ऑफिस पर यह 100 या 200 करोड़ कमाने वाली फिल्म नहीं है. लेकिन अभिनय और कहानी की वजह से जरूर सराही जाएगी. फिल्म का कोई ऐसा गीत भी नहीं है जो रिलीज से पहले प्रसिद्ध हुआ हो. यही कारण है कि अभिनय और कहानी पर ध्यान देने वाले दर्शक भी इस फिल्म को नजदीकी सिनेमाघरों में खोज पाएंगे.

बॉक्स ऑफिस:
फिल्म का बजट ज्यादा नहीं है लेकिन इसकी खास तरह की ऑडियंस है जो खुद ब खुद सिनेमाघर तक पहुंच जाएगी.

डायरेक्टर: दीपेश जैन

स्टार कास्ट: मनोज बाजपेयी, नीरज कबि, शहाना गोस्वामी,ओम सिंह,रणवीर शोरी

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