वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रुपये में लगातार हो रही गिरावट के लिए ‘इसे’ ठहराया जिम्मेदार

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा कि रुपये में गिरावट वैश्विक कारकों की वजह से है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अन्य मुद्राओं की तुलना में रुपये की स्थिति बेहतर है. अंतर बैंक विदेशी विनिमय बाजार में बुधवार को लगातार छठे दिन गिरावट का सिलसिला कायम रहा. रुपया 17 पैसे और टूटकर 71.75 प्रति डॉलर के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ. पिछले छह कारोबारी सत्रों में रुपया 165 पैसे टूट चुका है.

वित्त मंत्री ने कहा कि यदि आप घरेलू आर्थिक स्थिति और वैश्विक स्थिति को देखें, तो इसके पीछे कोई घरेलू कारक नजर नहीं आएगा. इसके पीछे वजह वैश्विक है. जेटली ने कहा कि डॉलर लगभग सभी मुद्राओं की तुलना में मजबूत हुआ है. वहीं दूसरी ओर रुपया मजबूत हुआ है या सीमित दायरे में रहा है. उन्होंने कहा कि रुपया कमजोर नहीं हुआ है. यह अन्य मुद्राओं मसलन पाउंड और यूरो की तुलना में मजबूत हुआ है.

उधर जेटली ने पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों में राहत देने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती के कोई संकेत नहीं दिए. उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है और इनमें कोई तय बदलाव नहीं दिख रहा है. अरुण जेटली ने कांग्रेस शासनकाल के दौरान पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों की सुषमा स्वराज और उनके खुद के द्वारा की गई आलोचना का बचाव करते हुए कहा कि उस समय मुद्रास्फीति दहाई अंकों में थी. यदि हम उस समय आलोचना नहीं करते तो यह कर्तव्यों से विमुख होना होता.

उन्होंने कहा कि भारत कच्चे तेल का शुद्ध खरीदार है और जब इसकी कीमतें अल्पकालिक तौर पर भी ऊपर जाती हैं, भारत पर गहरा प्रतिकूल असर होता है. उन्होंने इन्हें बाह्य कारक करार दिया. जेटली ने कहा, ‘कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में कोई स्पष्ट नियमित बदलाव नहीं होता है. ये ऊपर जाती हैं और गिर जाती हैं. अप्रैल और मई में काफी दबाव रहा था. जुलाई में ये नीचे आईं और अगस्त में ये पुन: चढ़ गईं. पिछले दो दिनों में इनमें सुधार देखा गया है.’ उनसे पेट्रोल-डीजल की सर्वकालिक ऊंची कीमतों तथा इनमें कटौती की विपक्ष की मांग के बारे में पूछा गया था.

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