दिल्ली में भूख से 3 बहनों की मौत के केस पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार,याची से कहा-हाई कोर्ट क्यों नहीं गए

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दिल्ली में डेढ़ महीने पहले भूख से तीन बच्चों की मौत पर दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इन्कार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिल्ली हाई कोर्ट जाने की सलाह दी. सवाल भी पूछा कि दिल्ली से संबंधित इस मामले में आप हाई कोर्ट क्यों नहीं गए. इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि भुखमरी से मौतें दिल्ली ही नहीं पूरे देश में होती हैं. मगर, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया.दरअसल वकील मनीष पाठक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. कहा था कि झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चो तक मुफ्त में राशन की होम डिलीवरी की जाए. उन्होंने कहा था कि अगर गरीबों को वोट का अधिकार है तो फिर राशन का क्यों नहीं. मगर सुप्रीम कोर्ट ने दलीलों को ठुकराते हुए भुखमरी से बच्चों की मौत की याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया.

गौरतलब है है कि जुलाई में दिल्ली के मंडावली में एक ही परिवार की तीन बच्चियों की मौत भूख से ही होने की खबर सामने आई थी. दो बार हुए पोस्टमार्टम में एक ही बात सामने आई कि मौत भूख से हुई. लाल बहादुर शास्त्री और जीटीबी अस्पताल में पोस्टमार्टम कराए गए थे.रिपोर्ट में कहा गया था कि बच्चियों के शरीर में अन्न का एक दाना भी नहीं मिला.
भुखमरी से मौत – अब कौन है दिल्ली का ‘बॉस’, जवाब दे…
उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने तीन बच्चियों की कुपोषण से मौत के सवाल पर कहा था कि ”दिल्ली सरकार हर हाल में मानती है कि हमारी यह जिम्मेदारी है कि हम हर हाल में लोगों की हालत को ठीक करें, लोगों का खयाल रखें, चाहे इलाज के लिए, चाहे गरीबी के लिए हो, भुखमरी के लिए हो. मानता हूं कि बिल्कुल सरकार की ज़िम्मेदारी है.

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