’10 साल से लापता’ पिता से बेटे का जेल में अचानक हुआ सामना और…

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कोई अपना बरसों से बिछुड़ा अचानक सामने आ जाए तो क्या होगा? इस अहसास को बस समझा जा सकता है शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. ऐसे ही एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें देखा जा सकता है कि बरसों बाद एक बेटा अपने पिता को कैदी के तौर पर अचानक देखता है तो दोनों पर क्या बीतती है.

ये तस्वीर कहां की है, बेटा किन हालात में पिता से मिला, ये सब आप तक पहुंचाएंगे, लेकिन उससे पहले आपको बताएं कि कुछ अर्सा पहले सोशल मीडिया पर अहमदाबाद की एक तस्वीर वायरल हुई थी. ये तस्वीर उस मौके की थी जब एक स्कूल के बच्चों को एक वृद्धाश्रम में ले जाया गया. स्कूल की एक बच्ची वृद्धाश्रम में अपनी दादी को देखकर हैरान हो गई. दादी और पोती दोनों एक-दूसरे को देख रोने लगीं.

स्कूल के बाकी बच्चे भी यह दृश्य देखकर भावुक हो गए. दरअसल, उस बच्ची को पता ही नहीं था कि वृद्धाश्रम में उसकी दादी भी होगी. वो जब भी घर पर दादी के बारे में पूछती थी तो उसे यही बताया जाता था कि दादी किसी रिश्तेदार के घर पर गई हुई हैं.

अब लौटते हैं पहली तस्वीर पर जो थाईलैंड की बताई जा रही है. वहां एक स्कूल के बच्चों को मॉरल एजुकेशनल एक्टिविटी के तहत जेल दिखाने के लिए ले जाया गया. स्कूल का एक बच्चा जेल में कैदी के रूप में अपने पिता को सामने देखकर अवाक रह गया.

बीटा नाम के इस बच्चे ने बीते 10 साल से पिता का मुंह नहीं देखा था. बच्चे को घर पर यह नहीं बताया गया था कि उसके पिता जेल में हैं. बच्चे से यही कहा गया था कि उसके पिता लापता हैं. बच्चा पिता को देखते ही रोने लगा.

पिता-पुत्र की तस्वीर को अरोम खुनमोंग नामक शख्स ने सबसे पहले 05 सितंबर को अपने फेसबुक पेज पर अपलोड किया. इसके बाद उनकी ये पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई. अरोम खुनमोंग की ओर से बंजुद रायंग नामक एक संगठन चलाया जाता है. यह संगठन स्कूलों और कंपनियों के लिए शैक्षिक और मनोरंजक टूर की व्यवस्था करता है.

अरोम ने अपनी फेसबुक पोस्ट में जेल में पिता-बेटे के भावुक मिलन की घटना को विस्तार से बताया.

पिता और बेटे की तस्वीर के सोशल मीडिया पर वायरल होने के साथ ही फेसबुक, ट्विटर पर हजारों की संख्या में प्रतिक्रिया आने लगीं. खोजबीन से पता चला कि तस्वीर थाईलैंड के रेयॉन्ग प्रांत के एक जेल की है जहां “जाम रायोंग स्कूल” के बच्चों बच्चों को मॉरल एजुकेशन टूर पर ले जाया गया था.

अरोम ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा- ‘नैतिक मूल्यों को समझने के लिए 10वीं से 12वीं क्लास के बच्चे जब जेल परिसर में दाखिल हुए तो वहां पहले से तय जगहों पर तमाम कैदी खड़े थे. सारे बच्चे आगे बढ़ते गए, लेकिन 10वीं क्लास का एक बच्चा वहीं कोने में ठिठक गया. बच्चा एक कैदी की ओर देखता हुआ सुबके जा रहा था. मेरे लिए ये अजीब था. कैदी भी उस बच्चे को देखकर रो रहा था. मैंने बच्चे से पूछा कि क्या हुआ तो उसने बताया कि टीचर, वो मेरे पिता हैं. ये सुनकर मैं भी चौंक गया.

बच्चे ने पिता से मिलने की बात कही तो पिता तक ये बात पहुंचाई गई. पहले तो पिता ने बेटे से मिलने में हिचक दिखाई. पिता को डर था कि बेटे को स्कूल के सहपाठियों में शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा.

काफी मनाने के बाद पिता ने बेटे से मिलने की हामी भरी. टीचर्स ने जेल प्रशासन से मिलने के बाद पिता को कैदियों से अलग बुलवाया. पिता और बेटा दोनों आमने-सामने आते ही एक-दूसरे से लिपट कर रोने लगे. पिता ने बेटे से पूछा कि स्कूल के दोस्तों को भी पता चल गया होगा कि तुम्हारे पिता कैदी हैं. मेरी वजह से तुम्हें शर्मिंदगी का अहसास भी हो रहा होगा. इस पर बेटे का जवाब था- ‘नहीं बिल्कुल नहीं. मुझे आपसे मिलने की खुशी ज्यादा है.’

पिता ने बेटे से वादा भी किया कि वो जेल से निकलकर एक बेहतर इंसान बनेंगे. साथ ही बेटे को अच्छा इंसान बनने की नसीहत दी. फिर बेटे ने थाई संस्कृति के मुताबिक पिता के पैरों पर सिर रख कर विदा ली.

अरोम खुनमोंग ने पोस्ट में ये भी लिखा- ‘बेटे और पिता के इस भावुक मिलन को देखने के बाद मैं खुद अंदर तक हिल गया, इसलिए पिता के अपराध और सजा के बारे में नहीं लिख रहा हूं.’

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