दिल्ली के कारखानों में बंधुआ थे बिहार के बालक

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आगरा: दिल्ली के कारखाने में बिहार के दो बालकों को बंधुआ बनाकर काम लिया जा रहा था। मौका मिलने पर कारखाना मालिक के चंगुल से भागे दोनों बालक को कैंट रेलवे स्टेशन पर सोमवार सुबह चाइल्ड लाइन सदस्यों को मिल गए। उनके परिजनों को सूचित कर दिया है। बालकों ने चाइल्ड लाइन हेल्प डेस्क को बताया कि वह कटिहार (बिहार) के रहने वाले हैं। वह नई दिल्ली के उस्मानपुर शास्त्रीनगर स्थित कारखानों में गिलट की पायल एवं कानों के झुमके बनाने का काम करते थे। कारखानों के मालिक उन्हें सुबह 10 बजे से रात दो बजे तक काम कराते। उनसे मारपीट करते और खाना भी समय से नही देते। एक बालक पिछले दो महीने जबकि दूसरा नौ महीने से काम कर रहा है। बालकों ने बताया कि मालिकों द्वारा उन्हें बंद करके काम कराया जाता था। रविवार को ही बाहर जाने दिया जाता, उसी दिन उनके परिजनों से बात कराई जाती थी। रविवार तड़के दोनों बालक मौका पाकर वहां से भाग आए। छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में बैठकर आगरा आ गये। रेलवे चाइल्ड लाइन के सदस्य नरेंद्र परिहार ने बताया बालकों की जीडी थाना जीआरपी आगरा कैंट से कराई जा रही है। मेडिकल के बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जायेगा। साथ ही बाल कल्याण समिति के माध्यम से श्रम विभाग को भी अवगत कराया जाएगा कि वह मामले को बाल श्रम में पंजीकृत करे। मानव तस्करी निरोधक यूनिट आगरा को भी मामले की जाच हेतु अवगत कराया जाएगा। रेलवे चाइल्ड लाइन द्वारा बालकों के परिजनों से सम्पर्क किया जा रहा है। पांच हजार रुपये महीने वेतन का दिया था लालच: दोनों बालकों के कारखानों के मालिक भी उनके ही गांव के रहने वाले हैं। वह बालकों के परिजनों को एक हजार रुपये पेशगी देकर अपने साथ लाए थे। परिजनों से कहा गया था कि पांच हजार रुपये महीने दिया जाएगा। जबकि उन्हें वेतन नहीं दिया गया।

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