बेगूसराय मॉब लिंचिंग मामले में मुख्य सचिव और डीजीपी को NHRC की नोटिस, एडीजी ने बताया था सेल्फ डिफेंस

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बेगूसराय जिले में हुई मॉब लिंचिंग की घटना पर बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस भेजा है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बिहार के बेगूसराय जिले में भीड़ ने तीन अपराधियों की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. वहीं, पुलिस ने इस मामले में अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर पाई है. आयोग ने सरकार को भी इस तरह की घटना को रोकने को कहा है. वहीं, बेगूसराय के मामले में भी कार्रवाई कर 6 हफ्तों में रिपोर्ट पेश करने को कहा है. आयोग ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है.

गौरतलब हो कि बेगूसराय जिले के छौड़ाही थाना क्षेत्र के नारायण पीपर गांव में ग्रामीणों ने बीते शुक्रवार (7 सितंबर) को तीन अपराधियों की जम कर पिटाई की थी. जिससे एक की मौत घटनास्स्थल पर ही हो गयी थी़ जबकि, दो अन्य अपराधियों की मौत इलाज के दौरान अस्पताल में हुई थी. बताया गया था कि अपराधी छात्रा का अगवा करने पहुंचे थे. लेकिन, अपराधी ग्रामीणों के हाथ पकड़े गये और उनकी जम कर पिटाई की गयी. ग्रामीणों ने अपराधियों को लाठी और डंडों से पीटा था. जिससे तीनों अपराधियों की मौत हो गयी. वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि अपराधी हथियार लेकर बच्ची को अगवा करने आये थे. लेकिन समय रहते उसे पकड़ लिया गया.

इस मामले में बेगूसराय के पुलिस अधीक्षक आदित्य कुमार ने थाना प्रभारी सिंटू झा को निलंबित कर दिया गया. उन्होंने बताया कि थाना प्रभारी की लापरवाही की वजह से उन्हें निलंबित किया गया है. साथ ही पूरे मामले की जांच की जा रही है. इस मामले में अब एडीजी मुख्यालय एस के सिंघल ने बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि बेगूसराय की घटना मॉब लिचिंग नहीं है. लोगों ने सेल्फ डिफेंस में ये कदम उठाया है. साथ ही उन्होंने कहा है कि मारे गये लोगों का लंबा अपराधिक इतिहास रहा है.

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