गंगा में पांच बच्चे डूबे, दो को लोगों ने बचाया

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गायघाट की स्लम बस्ती में रहते थे बच्चे, कपड़ा धोने के बाद नहाने लगे थे राजा घाट मेंआलमगंज थाना क्षेत्र के राजा घाट पर बुधवार की शाम लगभग चार बजे गंगा स्नान के दौरान चार बच्चियां व एक बच्चा डूब गया. तट पर मौजूद लोगों ने दो बच्चियों को बचा लिया, जबकि एक बच्चा व दो बच्चियां डूब गये.

घटना की सूचना मिलते ही आलमगंज थाने की पुलिस मौके पर पहुंची. इसके बाद गोताखोर रामप्रवेश सहनी व एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया. तलाशी के दरम्यान डूबी एक बच्ची की लाश निकाली गयी, जबकि बचायी गयीं दो बच्चियों को उपचार के लिए नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

थानाध्यक्ष ओम प्रकाश ने बताया कि गुरुवार को डूबे दोनों बच्चों की तलाश की जायेगी. एसडीओ राजेश रोशन ने बताया कि मृतक के आश्रितों को नियमानुकूल मुआवजा राशि का भुगतान कराया जायेगा. लाश के पोस्टमार्टम कराने के बाद ही लगभग चार लाख की राशि का भुगतान होगा. वार्ड संख्या 53 के गायघाट काली मंदिर आंबेडकर स्लम बस्ती में रहने वाले तीनों डूबे बच्चों के परिजनों ने बताया कि वे नगर निगम में सफाई कर्मी का काम करते हैं.

बस्ती में पानी संकट रहता है. इसी वजह से कपड़ा धोने व स्नान करने के लिए गंगा नदी के राजा घाट पर बुधवार की दोपहर दो बजे के आसपास में मनोज राम की 12 वर्षीया पुत्री राधिका, भोला राम की 14 वर्षीया पुत्री रौनी कुमारी, जीतू राम का 11 वर्षीय पुत्र रोहित कुमार, नंदिनी व सुमन के साथ गये थे. जहां कपड़ा धोने के बाद शाम चार बजे के लगभग स्नान के लिए पानी में उतरे. इसी क्रम में डूबने लगे. हालांकि, तट पर मौजूद रघु व अन्य लोगों ने 12 वर्षीया नंदिनी व सुमन को बचा लिया . बताया जाता है कि राधिका के डूबने के बाद एक- दूसरे को बचाने की कोशिश में यह हादसा हुआ.

गंगा तट से महज पांच मिनट की दूरी पर गायघाट में स्थित बस्ती में जब बच्चों के डूबने की खबर पहुंची, तो घर से लेकर घाट तक कोहराम मच गया. बस्ती में मची अफरा-तफरी के बीच महिलाएं, पुरुष व बच्चे गंगा तट की ओर दौड़े. काफी संख्या में बस्ती के लोग गंगा तट पर पहुंच गये. वार्ड की पार्षद किरण मेहता व पार्षद प्रतिनिधि धनंजय मेहता भी पहुंचे. इसके बाद पुलिस प्रशासन को खबर दी गयी. पुलिस टीम ने वहां पहुंच कर शवों को निकालने की कवायद शुरू की.

पुलिस ने गोताखोर राजेंद्र सहनी,रामप्रवेश सहनी व गायघाट में रहने वाली एसडीआरफ टीम को सूचना दी. सूचना के बाद शवों को निकालने का काम शुरू हुआ. इसके बाद मनोज राम की 12 वर्षीया पुत्री राधिका की लाश गंगा से निकाली गयी. हालांकि, गोताखोर व एसडीआरएफ की टीम अंधेरा होने की वजह से डूबे अन्य बच्चों की तलाशी का काम बंद कर दिया. अब टीम गुरुवार को फिर से डूबे बच्चों की तलाश गंगा में करेगी.

मसौढ़ी : धनरूआ थाना के रमनीबिगहा दिलावरचक गांव के पास स्थित पानी भरे पईन में बुधवार की सुबह शौच करने के दौरान पैर फिसल जाने से दो परिवारों के चार बच्चे डूब गये. इनमें से दो की मौत हो गयी, जबकि अन्य दो बच्चों का उपचार धनरूआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हो रहा है.

वहां उनकी स्थिति गंभीर बतायी जाती है. रमनीबिगहा दिलावरचक गांव के प्रेमचंद के तीन बच्चे सीता कुमारी (8), रीता कुमारी (6) व रमन कुमार (4) और प्रेमचंद के भाई राम भज्जु की पुत्री प्रियंका कुमारी (9) सुबह गांव के पास स्थित सड़क किनारे पईन के पास शौच करने गये थे. इसी दौरान सीता का पैर फिसल गया और वह पईन में जा गिरी. उसे बचाने के लिए बारी-बारी से प्रियंका, रमन व रीता भी कूद गयी, लेकिन चारों पईन में डूब गये. उन्हें डूबते देख ग्रामीणों ने उन्हें बचाने के लिए पईन में छलांग लगा दी और बारी-बारी से रीता, रमन व सीता को बाहर निकाला.

पईन के गहरे गड्ढे में प्रियंका के बैठ जाने के कारण काफी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला जा सका. गंभीर रूप से घायल रीता व रमन को परिजनों ने अस्पताल न ले जाकर पास के गांव सांईं में झाड़-फूंक कराने के लिए ओझा के पास ले गये. मौके पर पहुंचे बीडीओ को इसकी सूचना मिली तो वे ओझा के घर पहुंच गये और दोनों घायलों के परिजनों व ओझा को जमकर फटकार लगायी. इसके बाद उन्होंने दोनों घायलों को अपनी गाड़ी से धनरूआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाकर उपचार के लिए भर्ती कराया.

धनरूआ के बीडीओ रामजी पासवान ने मृतका सीता के पिता प्रेमचंद डोम व प्रियंका के पिता रामभज्जु डोम को पारिवारिक लाभ योजना के तहत बीस-बीस हजार रुपये मुआवजा दिया. इसके अलावा मुखिया संगीता देवी ने कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत उन्हें तीन-तीन हजार रुपये दिये. बीडीओ ने उन्हें आश्वासन दिया कि आपदा के तहत शीघ्र ही उन्हें चार-चार लाख रुपये दिया जायेगा.

मसौढ़ी. बुधवार की सुबह धनरूआ के रमणीबिगहा दिलावरचक में पईन में डूबे चार बच्चों में से दो की जान 12 वर्षीया बुधिया देवी की तत्परता से बचायी जा सकी.

बुधिया उक्त पईन के पास मवेशी के लिए घास काट रही थी. इसी बीच उसने देखा कि एक-एक कर गांव के चार बच्चे पईन में डूब गये. बुधिया इस घटना को देख बिना देर किये भाग कर गांव पहुंची और सीता के पिता प्रेमचंद को सूचना दी. प्रेमचंद यह सुन गांव में शोर मचाते पईन की ओर भागा. प्रेमचंद का शोर सुन अन्य ग्रामीण भी वहां पहुंचे और पईन में छलांग लगा दो बच्चे रीता व उसके सहोदर रमण की जान बचायी.

धनरूआ के रमणीबिगहा दिलावरचक करीब 25 घरों का टोला है और उक्त गांव में एक भी शौचालय नहीं है. ग्रामीणों की मानें तो शौचालय नहीं रहने की वजह से उक्त महादलित परिवार के लोग आज भी खुले में शौच करने जाते हैं.

यही वजह है कि बुधवार को भी सीता, अपनी बहन रीता व भाई रमण के अलावा चचेरी बहन प्रियंका के साथ प्रतिदिन की तरह विद्यालय जाने के पूर्व शौक के लिए पईन के पास चली गयी और एक-एक कर पानी से भरे पईन में चारों बच्चे जा गिरे. ग्रामीणों का कहना था कि शौचालय रहने की स्थिति में बच सकती थी दोनों की जान.

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