गांधी जयंती पर देना है भाषण तो ऐसे करें तैयारी, जीत सकते हैं इनाम!

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सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर चलकर देश को आजादी दिलाने वाले मोहनदास करमचंद गांधी यानी कि महात्मा गांधी का आज जन्मदिन है। गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1869 को पिता करमचंद गांधी और माता पुतलीबाई के घर उनका जन्म हुआ था। आजादी में उनके अतुलनीय योगदान की वजह से उन्हें भारत के राष्ट्रपिता से भी संबोधित किया जाता है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सबसे पहले उन्‍हें राष्‍ट्रपिता कह कर संबोधित किया था। महात्मा गांधी सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की मुखालफत करने वाले नेता बनकर उभरे। बाद में भारत के स्वतंत्रता संघर्ष को अहिंसात्मक तरीके से नेतृत्व प्रदान किया। उन्‍होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारत में सत्‍याग्रह और अहिंसा का तरीका अपनाया था। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह किया। असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन का संचालन किया। इसी बल पर उन्होंने भारत को 200 साल की गुलामी से आजादी दिलाई। रक्तहीन क्रांति से देश को आजादी दिलाने की वजह से उन्हें सारे भारतवर्ष में बड़े ही आदर और सम्मान के साथ याद किया जाता है। सिर्फ भारत में ही नहीं, दुनिया भर में महात्मा गांधी को उनकी जयंती के दिन बड़ी ही श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। उनके जन्मदिवस को सारे विश्व में विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती को भारत में राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देश भर में तमाम कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। निबंध और भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। अगर आप भी गांधी जयंती पर भाषण अथवा निबंध प्रतियोगित में भाग ले रहे हैं तो ये सामग्री आपकी काफी मदद कर सकती है। लोगों के सामने बेहतर तरीके से अपनी बातों को रखने के लिए जरूरी है कि आप बेहतर तरीके से अपना भाषण तैयार करें। ऐसे में अपने भाषण या निबंध लिखने के लिए आप इन कुछ सामग्रियों का सहारा ले सकते हैं।

भाषण या निबंध के लिए सामग्री – मॉब लिंचिंग, विचारधाराओं से असहमति रखने वालों की हत्या, जाति के नाम पर हत्या, सत्ता पाने के लिए दंगों जैसे अनैतिक कृत्यों का सहारा लेने या उन्हें समर्थन देने जैसी हिंसक दुर्घटनाओं के बीच हम सारी दुनिया को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले महात्मा गांधी की 150 जयंती मनाने जा रहे हैं। महात्मा गांधी उस शख्सियत को कहा जाता है जिसने बिना हथियार उठाए भारत में तकरीबन 200 सालों से अपनी जड़ें जमाए आततायी, निरंकुश और अन्यायी अंग्रेजी शासन का तख्त हिलाकर रख दिया था। अहिंसा का इससे सशक्त उदाहरण दुनिया के किसी कोने में नहीं मिलता। परमाणु हथियारों के इस युग में गांधी इसीलिए दुनिया की अपरिहार्य जरूरत नजर आते हैं क्योंकि उन्होंने तत्कालीन वक्त के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य को भी सिर्फ अहिंसा और असहयोग के बल पर अपनी बात मनवाने पर मजबूर कर दिया था। यह एक अद्भुत किस्म का क्रांतिकारी प्रयोग था। बाद में इसी प्रयोग को दुनिया के कई देशों में अन्यायी प्रशासन के खिलाफ लड़ने के लिए इस्तेमाल किया गया था। सत्याग्रह की मदद से ही नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़ाई जीतने में सफल रहे थे। उन्हें दक्षिण अफ्रीका का गांधी भी कहा जाता है।

महात्मा गांधी को विश्व पटल पर अहिंसा के प्रतीक के तौर पर जाना जाता है। उनके जन्मदिवस को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में हिंसा से त्रस्त दुनिया को जब भी शांति की जरूरत महसूस होती है तब वह हमारे देश की ओर और महात्मा गांधी के आदर्शों की ओर निहारता है। यह सच है कि इस बात पर आने वाली पीढ़ी को कम ही विश्वास होगा कि सदियों से शांति और सत्य का पैरोकार यह विश्व का प्राचीनतम देश अहिंसा के रास्ते पर चलकर आजादी की मंजिल तक पहुंचा है। इसीलिए, महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंसटाइन ने महात्मा गांधी के बारे में तभी कह दिया था कि आने वाली नस्लों को मुश्किल से ही इस बात पर विश्वास होगा कि हांड़-मांस से बना ऐसा कोई इंसान भी धरती पर आया था। महात्मा गांधी को अपने सत्य और अहिंसा के सिद्धांत पर पूरा भरोसा था। उनका यही भरोसा नए भारत के निर्माण का आधार है। इसलिए, भारत में राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक या किसी भी तरह की सत्ता के लिए हिंसा करना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

इसके अलावा भी महात्मा गांधी का जिंदगी तमाम मानवीय आदर्शों की प्रयोगशाला रही है। उन्होंने मानव जीवन के लिए सही माने जाने वाले तमाम आदर्शों का प्रयोग अपने जीवन में किया था। गांधीजी के तीन बंदरों के बारे में हम सभी ने सुना है। बुरा मत कहो, बुरा मत सुनो और बुरा मत देखो के प्रतीक स्वरूप ये तीनों बंदर हमें जीवन जीने के सही तरीके के बारे में बताते हैं। इस संदेश को अगर हम अपने जीवन में उतार लें तो हमारी कितनी समस्याएं अपने आप सुलझ जाएं। गांधीजी बहुत धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। उनके सभी आदर्श प्राचीन भारतीय संस्कृति से प्रेरित हैं, पुराणों, वेदों और उपनिषदों से प्रेरित हैं। एक विद्यार्थी के रूप में गांधी जी भले औसत रहे हों लेकिन जीवन पथ पर उन्होंने जो आदर्श और मूल्य स्थापित किए वह आज के दौर में सारी दुनिया के लिए अनुकरणीय हैं।

गांधीजी ने नमक आंदोलन से सिखाया कि अगर शासन अन्यायी है तो उसका विरोध करो। लेकिन यह विरोध अहिंसात्मक हो। अगर आप सत्य के साथ हैं तो जीत आपकी जरूर होगी। इसी तरह उन्होंने सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन और असहयोग आंदोलन से राजनैतिक शक्तियों के आततायी होने पर विरोध का सबसे सही, सटीक और आदर्श मार्ग सुझाया। गांधी जी जीवन भर छुआछूत, जातिवाद, बाल विवाह सहित समाज में फैली अनेक बुराइयों के खिलाफ लड़ते रहे। उन्होंने स्वच्छता को भी जीवन का एक अहम हिस्सा माना और कहा कि जहां साफ-सफाई है वहीं पर ईश्वर का वास होता है। भारत सरकार का स्वच्छता अभियान महात्मा गांधी से ही प्रेरित है। सत्य महात्मा गांधी के सर्वाधिक विश्वस्त हथियारों में से एक था। उन्होंने अपने जीवन में सत्य के साथ अनेक प्रयोग किए। इन सभी प्रयोगों के बारे में उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा है। महात्मा गांधी ने इन प्रयोगों के आधार पर ही कहा है कि दुनिया में सत्य से बेहतर कुछ नहीं, क्योंकि जहां सत्य है, वहां अहिंसा है। जहां अहिंसा है, वहीं ईश्वर है।

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