भारत में और बढ़ा भ्रष्टाचार, पिछले साल के मुकाबले 11 फीसदी ज्यादा दी गई रिश्वत : रिपोर्ट

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लंदन : भारत में भ्रष्टाचार को खत्म करने के भले तमाम दावे किए जाते हों, लेकिन हकीकत की तस्वीर इससे कहीं जुदा है. पिछले साल के मुकाबले इस साल भारत में घूस देने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. पिछले एक साल में देश के 56 फीसदी लोगों ने या तो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से घूस दी है. ये दावा ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया एंड लोकल सर्किल्स ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है. ये सर्वे 1.60 लाख प्रतिक्रियाओं के आधार पर किया गया है. दुनिया भर में भ्रष्टाचार के इंडेक्स में भारत का स्थान 79 से फिसलकर 81वें नंबर पर पहुंच गया है.

पिछले साल 45 फीसदी लोगों ने देश में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से अपने काम के लिए रिश्वत दी थी. इस साल ये आंकड़ा बढ़कर 56 फीसदी पर पहुंच गया. इस सर्वे के अनुसार, 58 फीसदी लोगों का कहना है कि उनके राज्य में एंटी करप्शन हेल्पलाइन जैसी कोई चीज नहीं है. वहीं 33 फीसदी लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि वह इस तरह की किसी भी हेल्पलाइन से परिचित नहीं हैं.

सबसे ज्यादा घूस कैश में दी गई…
इस सर्वे में सामने आया है कि इस घूस में सबसे ज्यादा नकद लेन देन का इस्तेमाल हुआ है. कुल रिश्वत में 39 फीसदी रकम नकद दी गई. वहीं 25 फीसदी एजेंट द्वारा घूस दी गई. इसमें सबसे ज्यादा घूस पुलिसवालों को दी गई. कुल घूस में 25 फीसदी रिश्वत की रकम पुलिस वालों की दी गई. इसके बाद नगर निगम, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और दूसरे प्राधिकरण में घूस दी गई.

2017 में 30 फीसदी घूस पुलिसवालों ने ली थी. 27 फीसदी रिश्वत नगर निगम और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन ऑफिस में ली गई. सर्वे बताता है कि पिछले साल और इस साल रिश्वत देने वाले 36 फीसदी लोगों का कहना था कि अपना काम कराने का यही एकमात्र तरीका है. पिछले साल जहां 43 फीसदी लोग कह रहे थे कि अपना काम कराने के लिए वह रिश्वत नहीं देते तो इस साल ऐसे लोगों का आंकड़ा 39 फीसदी ही था.

सीसीटीवी का कोई असर नहीं
इस रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि लोगों को उन सरकारी दफ्तरों में भी रिश्वत देनी पड़ी जहां पर सीसीटीवी कैमरे लगे थे. करीब 13 फीसदी लोगों ने तो ऐसी जगहों पर इस साल घूस देने की बात स्वीकारी भी है.

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