#MeeToo पर बोलीं मेनका गांधी, मामलों की जांच के लिए बनेगी कमेटी

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नई दिल्ली : महिलाओं पर हुए यौन शोषण के खिलाफ सोशल नेटवर्किंग साइट पर मीटू कैंपेन में अब तक कई प्रख्यात नाम सामने आ चुके हैं. मामले की गंभीरता को समझते हुए अब सरकार इस पर एक्शन लेने की तैयारी कर रही है. केंद्रीय महिला एवं बाल मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि मीटू मामलों की सुनवाई के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा.

जज और कानून विशेषज्ञों से होगी भरपूर
शुक्रवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मेनका गांधी ने कहा कि सरकार द्वारा जल्द ही एक कमेटी का गठन किया जाएगा. इस कमेटी में जज और कानून विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो पहले मामलों की गहनता से जांच करेंगे और फिर इसकी सुनवाई करेंगे. मेनका गांधी ने कहा कि मी टू मामलों की जन सुनवाई के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की चार सदस्यीय समिति गठित की जाएगी.

पीड़ितों के दर्द को समझ सकती हूं-मेनका
मेनका गांधी ने कहा, ‘मैं प्रत्येक शिकायत की पीड़ा और सदमा समझ सकती हूं.’ उन्होंने कहा कि किसी के दर्द को समझने से बात नहीं बनती है, इसलिए उन्होंने इस बात का फैसला लिया है कि इस मामलों की जांच के लिए वरिष्ठ न्यायाधीश, कानूनी विशेषज्ञों वाली प्रस्तावित समिति बनाई जाएगी.

बॉम्बे हाईकोर्ट के जज ने किया समर्थन
बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति गौतम पटेल देश में चल रहे ‘मी टू’ अभियान के समर्थन में खुल कर आये हैं और कहा है कि पितृसत्तात्मक दुनिया महिलाओं को खुल कर बोलने की अनुमति नहीं देती है. न्यायमूर्ति पटेल ने गुरूवार को कहा कि वह उन महिलाओं का ‘‘पूरी तरह समर्थन’’ करते हैं जिन्होंने यौन उत्पीड़न के अनुभवों को साझा करने और प्रताड़ित करने वालों का नाम उजागर करने का निर्णय किया है.

सोशल नेटवर्किंग साइट पर जोर पकड़ती मुहिम
देश में जारी ‘मी टू’ मुहिम के तहत शुक्रवार को भी कई महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न या यौन दुर्व्यवहार के अनुभव साझा किए, जिसके लपेटे में केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर और फिल्म अभिनेता आलोक नाथ सहित मीडिया और मनोरंजन जगत के कई नामी-गिरामी चेहरे आए हैं. यौन उत्पीड़न की परिभाषा और उचित प्रक्रिया पर समाचार कक्षों, ड्रॉइंग रूमों और सोशल मीडिया साइटों पर ‘मी टू’ मुहिम के बारे में चल रही जोरदार बहस के बीच कई ऐसे पत्रकारों के नाम सामने आए हैं जिन पर महिलाओं ने यौन उत्पीड़न या यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं. एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने यौन उत्पीड़न की शिकार महिला पत्रकारों का पुरजोर समर्थन करते हुए मीडिया संस्थानों से अपील की कि वे ऐसे सभी मामलों में बिना भेदभाव के जांच करें.

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