दुर्गापूजा को लेकर पूजा पंडालों में उमड़ी लोगों की भीड़

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मां दुर्गा के अलौकिक दिव्य दर्शन की बेला आ चुकी है. वैदिक मंत्रों का उच्चारण, ढोल-नगाड़ों का आह्वान, जगमगाती रोशनी और गूंजती भक्ति गीत भक्तों को बरबस पूजा पंडालों के पास खींच रही है. धूप, नैवेद्यम की खुशबू भक्तों को विभोर कर रहे हैं. दुर्गोत्सव से सराबोर राजधानी खिल उठी है. भव्य पूजा पंडालों की छटा देखते ही बन रही है. अपनी कला को साधे कलाकारों ने पंडालों और मां की प्रतिमा को ऐसा रूप दिया है कि राजधानी की धरती पर दूर-दूर की कलाकृतियां और धरोहर अवतरित हो गयी हैं. साज-सज्जा और रंगीन रोशनी संहारिणी मां दुर्गा की दरबार की भव्यता का बखान कर रहे हैं. मां दुर्गा के दर्शन देने के बाद राजधानीवासियों के हाथ माता की वंदना में जुड़ गये. प्रार्थनाएं होती रहीं और शेरोवाली माता का जयकारा लगता रहा. दीघा से लेकर पटना सिटी तक और बाइपास से लेकर अशोक राजपथ तक माता के गीतों से पूरी राजधानी भक्तिमय हो गयी. हर मुहल्ले में पूजा पंडालों में माता के आगमन के बाद प्रार्थना मंत्र गूंज रहे हैं. दोपहर से ही लोग सड़क पर निकलने शुरू हो गये हैं. लोग जगह-जगह रुक कर मां के दर्शन कर रहे हैं. सेल्फी भी ले रहे हैं. महाअष्टमी को लेकर भी लोग अपने-अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शहर में बनी मां के प्रतिमा और पंडालों के दर्शन करने के लिए उमड़ रहे हैं. पूजा को लेकर लोगों में उत्साह, जोश और उमंग दिख रहा है. हर बार की तरह इस बार भी सभी दुर्गापूजा कमेटियां उत्सव को यादगार बनाने के लिए कुछ न कुछ खास करने में जुटी हुई हैं. इसकी झलक अब राजधानी के हर गली-मुहल्ले में दिखायी दे रही है. एक से बढ़ कर एक थीम पर पूजा पंडाल और मां दुर्गा की आकृतियां बनायी गयी हैं. कहीं शीशा, नग और समुद्री सीप से 80 फुट ऊंचा पंडाल बनाया जा रहा है, तो कहीं देश के ऐतिहासिक स्मारक, तो कहीं ऐतिहासिक तथ्यों पर पंडाल बनाये जा रहे हैं. मां आदिशक्ति की भक्ति के साथ ही सबकुछ भव्य और खास है. डाकबंगला चौराहे पर पंडाल में कांच की 40 हजार चूड़ियां और शीशे लगे हैं. बोरिंग रोड चौराहे पर अक्षरधाम मंदिर, एसकेपुरी में सभ्यता द्वार, आनंदपुरी में समुद्री जनजीवन की थीम पर पंडाल आकर्षण का केंद्र है. डोमन भगत लेन में रानी लक्ष्मीबाई को दिखाया गया है. गोलघर के पास कोलकाता के काली मंदिर का प्रतिरूप है. गर्दनीबाग में हनुमान जी की झांकी आकर्षण का केंद्र है.
प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय कंकड़बाग सेवा केंद्र की निदेशिका बीके संगीता ने बताया कि पहली बार 1975 में कदमकुआं से चैतन्य देवियों की झांकी की शुरुआत हुई थी. उससमय से हर साल यह झांकी प्रदर्शित की जाती है. कदमकुआं के बाद बोरिंग रोड, फिर कंकड़बाग पंच शिवमंदिर और अब डाकबंगला चौराहे समेत पांच जगहों पर झांकी हो रही है. इसमें हर 15 मिनट के बाद पांच मिनट के लिए पर्दा गिरता है, ताकि देवी की भूमिका निभानेवाली बहनें अपने हाथ-पैर सीधा कर सकें. गोविंद मित्रा रोड में विशाल पंडाल आकर्षण का केंद्र है. शिवपुरी मोहल्ले को एलइडी लाइट और डिस्को बल्ब से रोशन किया गया है.

कहां क्या है खास?

खजपुरा : कंबोडिया का बायोन मंदिर

शेखपुरा : वर्ली आर्ट का पंडाल

कंकड़बाग : पहाड़ों पर शंकर जी की विशाल प्रतिमा

डोमन भगत लेन : झांसी का मशहूर किला

एसके पुरी, बोरिंग रोड : सभ्यता द्वार

कदमकुआं : इंडिया द्वार पंडाल

रूकनपुरा : उजयंता पैलेस

जगदेव पथ : महिष्मति महल

पुलिस लाइन, बुद्ध मार्ग : कोलकाता काली मंदिर

बोरिंग रोड चौराहा : अक्षरधाम मंदिर

बोरिंग कैनाल रोड : द्वारिकाधीश मंदिर

आनंदपुरी : समुंद्री जन जीवन पंडाल

गर्दनीबाग : हनुमान जी की झांकी

दुजरा पहलवान घाट : बेटी, पर्यावरण और जल बचाओ संदेश

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