ईरान में फंसे राज्य के 12 युवाओं की वतन वापसी, युवा स्वर्ण कारीगरों के पासपोर्ट आदि जब्त कर लिये थे

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ईरान में अपने नियोक्ता द्वारा बंधक बनाये जाने वाले 12 स्वर्ण कारीगर बुधवार तड़के कोलकाता लौट आये. ईरान में इन युवाओं का पासपोर्ट, वीजा आदि जबरन ले लिया गया था और खाना-पीना भी दुश्वार कर दिया गया था. पासपोर्ट लौटाने के एवज में एक-एक युवक से 3.60 लाख रुपये मांगे जा रहे थे.

युवाओं ने बंगाल में अपने परिजनों को एक वीडियो संदेश भेज कर अपनी दुर्दशा की जानकारी दी थी. परिजनों की ओर से नेशनल एंटी ट्रैफिकिंग कमेटी से संपर्क किया गया. मामला प्रधान मंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय तक भी पहुंचा. इसके बाद ईरान में भारतीय दूतावास की मदद से इन युवाओं को छुड़ाया गया और स्वदेश वापस भेजने की व्यवस्था की गयी.

गौरतलब है कि हुगली, कूचबिहार, हावड़ा और बर्दवान जिले के युवा गत फरवरी महीने में ईरान गये थे. उनके नियोक्ताओं ने उन्हें धोखा दिया था और उनके दस्तावेज ले लिये थे. युवाओं के मुताबिक उन्हें गियासुद्दीन मल्लिक लेकर गया था. मल्लिक दुबई में पिछले 15 वर्षों से एक शोरूम में काम करता था. गत वर्ष वह ईरान के एक शेख से मिला था जिसने भारत से 10-11 श्रमिकों को लाने के लिए कहा था. उसने आश्वस्त किया था कि उन्हें उपयुक्त भोजन और वेतन दिया जायेगा.

परिजनों के मुताबिक, मल्लिक ने इन सभी युवाओं से 50 से 60 हजार रुपये लिए और फरवरी महीने में उन्हें ईरान पर्यटक वीजा पर ले गया. वापस लौटने पर गियासुद्दीन मल्लिक ने बताया कि युवाओं के साथ वह भी बंधक था. जो पैसे उसने लिए थे वह हवाई टिकट और अन्य आधिकारिक कार्य के लिए थे. नेशनल एंटी ट्रैफिकिंग कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन शेख जिन्नार अली ने बताया कि इन सबके पीछे अब्दुल फरीद नामक व्यक्ति है जो फरार है. वह देश भर से युवाओं को ऐसे ही विदेश ले जाता है. उनसे पैसे लेता है और फिर विदेश जाने वाले युवाओं की हालत बदतर हो जाती है.

गौरतलब है कि युवकों के ईरान में फंसे होने और उनके परिजनों की परेशानियों को प्रभात खबर ने प्रमुखता से उठाया. खबर प्रकाशित होने के बाद नेशनल एंटी ट्रैफिकिंग कमेटी हरकत में आयी और सरकारी महकमे से संपर्क किया गया. इसके बाद युवकों की वापसी संभव हो सकी है.

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