शिमला. प्रदेश के मंदिराें में हर रोज 20 टन चढ़ने वाले फूल अब यूं ही खराब नहीं हाेंगे। यह फूल घर, दफ्तर अाैर मंदिर काे महकाने के लिए दाेबारा से प्रयाेग में लाए जाएंगे। प्रदेश में पहली बार मंदिराें में चढ़ाए जाने वाले फूलाें से खास तरह की ऑर्गेनिक धूप अाैर अगरबत्ती तैयार की गई है। इन्हें गेंदे अाैर गुलाब के फूलाें के मिश्रण के साथ तैयार किया गया है।

प्रदूषण नियंत्रण बाेर्ड ने इंडाेर एयर पाॅल्यूशन काे खत्म करने के लिए नई तकनीक से इन्हें तैयार किया है और इन्हें इसे जल्द मार्केट में लॉन्च किया जाएगा। यह धूप और अगरबत्ती पर्यावरण काे संरक्षित रखने के साथ लाेगाें के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। इन्हें पालमपुर में सीएसअाईअार लैब में तैयार किया गया है। अभी इन्हें कांगड़ा के बृजेश्वरी मंदिर में भगवान की पूजा के लिए प्रयाेग में लाया जा रहा है। धीरे धीरे इसे दूसरे मंदिराें अाैर बाजार में लाेगाें के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा।

कैंसर और सिरदर्द का खतरा दूसरे धूप के मुकाबले कम
विशेषज्ञाें की मानें ताे इस धूप काे इस्तेमाल करने से कैंसर अाैर सिरदर्द का खतरा अाम धूप के मुकाबले कम रहता है। प्रदूषण नियंत्रण बाेर्ड के सदस्य सचिव डा. अारके पुरुथी ने माना कि इस धूप में अाम धूप अाैर अगरबत्ती के मुकाबले कार्बन माेनाेअाॅक्साइड अाैर वाेलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड की मात्रा 15 से 16 गुणा कम हाेती है। उन्होंने दावा किया कि इस धूप को मंदिर में चढ़ने वाले फूलों और दूसरे ऑर्गेनिक उत्पादों के साथ ऑर्गेनिक तरीके से तैयार किया गया है।

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