केंद्रीय एजेंसियों के विरोध से देश की एकता को खतरा :उपमुख्यमंत्री

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उपमुख्यमंत्री सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा कि गैर भाजपा शासित राज्यों को केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर एतराज क्यों है. क्या कांग्रेस को भ्रष्टाचारियों के संरक्षण का संविधान प्रदत्त कोई अधिकार है.
अगर ऐसा नहीं है, तो आयकर की कार्रवाई का मध्य प्रदेश की पुलिस को विरोध करने का निर्देश किसने दिया. क्या अब कांग्रेस यह घोषणा करने वाली है कि अगर उसकी सरकार बनी, तो देश के सभी भ्रष्टाचारियों, घोटालेबाजों को दोषमुक्त कर लूट की खुली छूट दे देगी. सारदा चिट फंड घोटाले में सीबीआइ की कोलकाता पुलिस आयुक्त से पूछताछ के खिलाफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का धरना पर बैठना, भ्रष्ट ठेकेदारों के खिलाफ आयकर की छापेमारी के विरोध में कर्नाटक के सामने धरना देना, दिल्ली के मुख्य सचिव से पूछताछ के खिलाफ उपराज्यपाल के घर के सामने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का धरना देना क्या साबित करता है.
उन्होंने कहा कि आखिर कांग्रेस शासित राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान आदि को सीबीआइ के राज्य में प्रवेश और कार्रवाई पर एतराज क्यों है. क्या कांग्रेस और गैर भाजपाई विपक्षी दलों ने यह तय कर लिया है कि भ्रष्टाचार और घोटाले के चाहे कितने भी संगीन मामले हो, उनके राज्यों में किसी राजनेता, कारोबारी, बिचौलिये आदि के खिलाफ केंद्रीय एजेंसी कोई कार्रवाई नहीं करेगी. क्या इस तरह से लोकतंत्र और संघीय ढांचे को बचाया जा सकता है.
इधर, डिप्टी सीएम ने ट्वीट कर कहा है कि लालू प्रसाद दूसरों से पांच साल का हिसाब मांगते हैं, लेकिन अपने उस 15 साल के राज का हिसाब नहीं देते. जब दर्जनभर नरसंहारों में सौ से ज्यादा दलितों की जान गयी और विकास ठप रहने के कारण 20 लाख लोगों को गांव-घर छोड़ कर पलायन करना पड़ा था. उनकी पार्टी अब विस्थापन रोकने के लिए काम करने का वादा कर रही है. तब उन्हें इसे प्रतिबद्धता नहीं, प्रायश्चित पत्र कहना चाहिए.

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