दूसरा चरण : अन्नाद्रमुक को 35, भाजपा को 26 सीटें बचाने की चुनौती

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नई दिल्ली, लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान गुरुवार को 95 सीटों पर होगा और इस चरण में अन्नाद्रमुक के समक्ष सबसे ज्यादा 35 और भाजपा के सामने 26 सीटों को बचाने की चुनौती है।

दूसरे चरण में 13 राज्यों की 95 सीटों पर मतदान होगा। इस चरण में कांग्रेस की 11 सीटें, शिवसेना की 4, बीजद की 3, राजद और जद(एस) की दो-दो, माकपा, जद(यू), तृणमूल कांग्रेस, राकांपा, नेशनल कांफ्रेस, एआईयूडीएफ, पीएमके और एआईएनआरसी की एक-एक सीटें दांव पर होंगी।

दूसरे चरण में तमिलनाडु में 38, कर्नाटक में 14, महाराष्ट्र में 10, उत्तर प्रदेश में आठ के साथ ही असम, बिहार और ओडिशा में पांच-पांच और पश्चिम बंगाल में तीन तथा जम्मू एवं कश्मीर में दो सीटों पर मतदान होगा। इसके साथ ही मणिपुर, त्रिपुरा और पुडुचेरी में एक सीट के लिए मतदान होगा।

पहले चरण में 11 अप्रैल को लोकसभा की 91 सीटों पर 20 राज्यों में मतदान हुआ था।

तमिलनाडु में सभी 38 सीटों पर गुरुवार को मतदान होगा और यह पहला चुनाव होगा, जब राज्य के दो दिग्गजों अन्नाद्रमुक की दिवंगत नेता जे. जयललिता और द्रमुक नेता एम. करुणानिधि की अनुपस्थिति में यहां वोट डाले जाएंगे।

वर्ष 2014 में अन्नाद्रमुक ने जयललिता के नेतृत्व में यहां की 39 सीटों में से 37 पर जीत दर्ज की थी। यहां हुए उपचुनाव में पार्टी एक सीट हार गई थी और उसके सामने 36 सीटें बचाने की चुनौती है।

अन्नाद्रमुक को द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन से बड़ी चुनौती मिल रही है।

अभिनेता से नेता बने कमल हासन की पाटी मक्कल निधि मय्यम भी पहली बार चुनाव मैदान में है।

कांग्रेस को 2014 में एक सीट नहीं मिली थी और इस बार उसने द्रमुक के गठबंधन के तहत नौ सीटों पर अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं।

तमिलनाडु के बाद कर्नाटक में 14 सीटों पर गुरुवार को मतदान होगा। यहां तुमकुर सीट से पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा किस्मत आजमा रहे हैं। उन्होंने अपनी पारंपरिक सीट हासन को अपने पोते प्राज्वल रेवन्ना के लिए छोड़ दी है।

देवेगौड़ा के दूसरे पोते निखिल कुमारस्वामी मांड्या से चुनाव मैदान में हैं, जहां उनका मुकाबला दिवंगत कन्नड़ अभिनेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री एम.ए अंबरीश की पत्नी सुमालता से है।

कर्नाटक में होने वाले 14 सीटों के मतदान में से भाजपा ने पिछले चुनाव में छह सीटें जीती थीं।

महाराष्ट्र में 10 सीटों पर मतदान होगा, जिसमें भाजपा और शिवसेना के सामने अपनी-अपनी चार-चार सीटें बचाने की चुनौती होगी। ये चार-चार सीटें दोनों ने पिछले चुनाव में जीते थे। हालांकि इस बार इन्हें कांग्रेस-राकांपा गठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है, क्योंकि ये किसानों में अंसंतोष और बेरोजगारी के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही हैं।

उत्तर प्रदेश में पहले चरण में जहां आठ सीटों पर मतदान हुआ था, वहीं दूसरे चरण में भी आठ सीटों पर मतदान होगा। भाजपा ने पिछले चुनाव में इन सभी आठ सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार हालांकि उसे सपा, बसपा और रालोद से कठिन चुनौती पेश की जा रही है।

असम में पांच सीटों पर मतदान होगा, जिसमें पिछले चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने दो-दो सीटें जीती थीं और एक सीट एआईयूडीएफ की झोली में गई थी।

बिहार में होने वाले पांच सीटों के लिए मतदान में से पिछले चुनाव में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी। इनमें ज्यादातर सीटें सीमांचल इलाके की हैं, जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा होने की वजह से भाजपा की राह मुश्किल दिख रही है।

छत्तीसगढ़ में गुरुवार को मतदान वाली तीन सीटों पर भाजपा ने पिछले चुनाव में जीत दर्ज की थी। इस बार इसने वर्तमान सांसदों को टिकट न देकर नए उम्मीदवारों को टिकट दिया है।

पश्चिम बंगाल में जलपाईगुड़ी, रायगंज और दार्जिलिंग में मतदान होंगे।

ओडिशा में चार सीटों पर मतदान होगा, जिसमें से सुंदरगढ़ सीट पर पिछली बार भाजपा ने जीत दर्ज की थी। राज्य की 21 में 20 सीटों पर फिलहाल बीजद का कब्जा है।

जम्मू एवं कश्मीर में पिछली बार केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद को पराजित किया था। इस बार उनका मुकाबला पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्ण सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह से होगा। श्रीनगर सीट पर नेशनल काफ्रेंस के पूर्व केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला चुनाव मैदान में हैं।

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