Lok Sabha Election 2019: लोकसभा चुनाव 2019 के लिए आज दूसरे चरण में मतदान हो रहे हैं. देश की 95 लोकसभा सीटों पर अपनी पसंद के प्रत्याशियों के लिए मतदाता वोट कर रहे हैं. इस बार कई राजनेताओं के साथ कुछ अभिनेताओं की किस्मत का भी फैसला होना है. उत्तर प्रदेश की कई लोकसभा सीटों पर फिल्मी सितारों या टीवी सितारों की किस्मत दांव पर है. हेमा मालिनी, राज बब्बर, स्मृति ईरानी, जया प्रदा, रवि किशन और दिनेश लाल निरहुआ ऐसे नेता हैं जो पहले अभिनेता रह चुके हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि यह अभिनेता किस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और क्या है उस सीट का समीकरण

1-हेमा मालिनी

बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी इस बार बीजेपी के टिकट पर उत्तर प्रदेश की मथुरा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहीं हैं. वह इस सीट पर 2014 के लोकसभा चुनाव में भी जीत चुकी हैं. एक बार फिर हेमा मालिनी यहां से मैदान में हैं और उनका मुकाबला कांग्रेस के महेश पाठक, राष्ट्रीय लोक दल के कुंवर नरेंद्र सिंह और स्वतंत्र जनताराज पार्टी के ओम प्रकाश से है.

हेमा मालिनी बॉलीवुड की प्रसिद्ध अदाकारा होने के साथ ही एक प्रोफेशनल भरत नाट्यम डांसर और कोरियोग्राफर भी हैं. वो बॉलीवुड में 70 के दशक की स्थापित सफल महिला कलाकारों से में से एक हैं. उन्होंने एक सौ पचास से भी ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया हैं. उनकी मशहूर फिल्मों में हिन्दी सिनेमा का सबसे बेहतरीन फिल्म शोले भी शामिल है. इस फिल्म में बसंती का किरदार हेमा मालिनी ने निभाई थी.

2- राज बब्बर

फिल्मी दुनिया में फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ से अपना सफर शुरू करने वाले राज बब्बर भी इस चुनाव में कुर्सी की दौर में हैं. वह कांग्रेस के टिकट पर फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. यहां राज बब्बर का मुकाबला बीजेपी के राज कुमार चाहर और गठबंधन के गुड्डू पंडित से है. यहां मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के बाबू लाल ने बसपा की सीमा उपाध्याय को हराया था.

यह कोई पहला मौका नहीं जब राज बब्बर चुनावी मैदान में हैं. राज बब्बर पहली बार 1994 में संसद पहुंचे थे, जब वह यूपी से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए. राज बब्बर शुरुआती दिनों से समाजवादी पार्टी में रहे. 1996 में उन्होंने अपने जीवन का पहला लोकसभा चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ लखनऊ सीट से लड़ा और उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

इसके बाद राज बब्बर ने 1999 में आगरा सीट से सपा के टिकट पर ही लोकसभा चुनाव लड़ा, जिसमें जीत दर्ज की. 2004 के आम चुनाव में भी राज बब्बर ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर आगरा सीट से एक बार फिर जीत दर्ज की. हालांकि, इसी बीच 2006 में उन्हें समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, जिसके बाद 2008 में राज बब्बर ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली.

इसके बाद कन्नौज सीट पर साल 2009 में हुए उपचुनाव में उन्होंने डिंपल यादव को हराया. हालांकि साल 2014 में वह गाजियाबाद सीट से चुनाव लड़े मगर बीजेपी के वीके सिंह से हार गए.

3-स्मृति ईरानी

स्टार प्लस की मशहूर धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से घर-घर में सबकी पंसदीदा कलाकार बन चुकी स्मृति ईरानी इस बार फिर उत्तर प्रदेश की हाई प्रोफाइल सीट अमेठी से चुनावी मैदान में हैं. 2014 के आम चुनाव की तरह की इस बार भी उनका मुकाबला कांग्रेस अध्यक्ष और मौजूदा सांसद राहुल गांधी से है. बता दें कि पिछली बार बीजेपी ने स्मृति को इस सीट से टिकट दिया था मगर वह हार गईं थीं.

हालांकि राहुल और स्मृति के बीच अंतर बेहद कम रहा था. साल 2014 में राहुल गांधी को 408,651 वोट मिले थे. जबकि बीजेपी की उम्मीदवार स्मृति ईरानी को 300,74 वोट मिले थे. इस तरह जीत का अंतर 1,07,000 वोटों का ही रह गया था.

स्मृति ईरानी ने राजनीति में आने से पहले एकता कपूर के द्वारा बनाए गए नाटक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी नाम की महिला का किरदार निभाया था. वहीं ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ नाटक के अलावा स्मृति ईरानी ने ओर भी कई सारे नाटकों में अपना अभिनय दिखाया है. जैसे ‘क्या हादसा क्या हकीकत’, ‘रामायण’, ‘मेरे अपने’ और इत्यादि.

4- जया प्रदा

फिल्म अभिनेत्री जया प्रदा इस बार उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहीं हैं. वह बीजेपी की प्रत्याशी हैं और इस सीट पर पहले भी दो बार चुनाव जीत चुकी हैं. सबसे पहले साल 1994 में उन्होंने साथी अभिनेता एन.टी. रामराव की तेलगू देशम पार्टी ज्वाइन किया था. बाद में उन्होंने रामराव से नाता तोड़ लिया और पार्टी के चंद्रबाबू नायडु वाले गुट में शामिल हो गईं. सन् 1996 में उन्हें आंध्र प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के लिए राज्य सभा में मनोनीत किया गया. फिर समाजवादी पार्टी ज्वाइन की. पहली बार उन्होंने साल 2004 में रामपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा था. तब समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और शानदार जीत हासिल की. इसके बाद साल भी वह साल 2019 में चुनाव जीती. हालांकि साल 2014 में वह हार गईं. अब आजम खान से खराब रिश्तों की वजह से वह सपा छोड़ बीजेपी में शामिल हो गईं हैं और इस बार रामपुर में आजम खान जो सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी हैं उनसे मुकाबला है.

जया प्रदा ने तेलुगू फिल्म ‘भूमिकोसम’ से अपने करियर की शुरूआत की. इस फिल्म में जया को 10 रुपये फीस के तौर पर मिले थे. इसके बाद साल 1979 में के. विश्वनाथ की ‘श्री श्री मुवा’ की हिंदी में रिमेक ‘सरगम’ के जरिए उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा. इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक खई हिट फिल्मों में काम किया.

5-रवि किशन

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का गढ़ कही जाने वाली गोरखपुर सीट पर बीजेपी ने इस बार किसी नेता को टिकट देने के बजाए अभिनेता पर दांव लगाया है. अभिनेता रवि किशन बीजेपी के टिकट पर गोरखपुर से ताल ठोकेंगे. वह भोजपुरी फिल्मों के जाने-पहचाने चेहरे हैं. उन्होंने कई हिन्दी फिल्मों में भी काम किया है. हिंदी सिनेमा और भोजपुरी सिनेमा अलावा कुछ दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम किया है. रवि किशन ने साल 1992 में पीताम्बर फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू किया था, जोकि एक बी ग्रेड फिल्म थी. वह झलक दिखला जा और बिग बॉस जैसे टीवी शो में भी नजर आ चुके हैं.

उनके सियासी सफर की बात करें तो साल 2014 में, उन्होंने कांग्रेस पार्टी की तरफ से जौनपुर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के कृष्ण प्रताप सिंह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद 2017 में वह कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए.

6-दिनेश लाल निरहुआ

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की आजमगढ़ सीट से बोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को टिकट दिया है. उनके खिलाफ मैदान में गठबंधन की ओर से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मैदान में हैं.

दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा नाम हैं. उनके खाते में कई बड़ी हिट फिल्में हैं. लोग उनके अभिनय और गायकी के दीवाने हैं. निरहुआ बिग बॉस में भी हिस्सा ले चुके हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में खासे मशहूर निरहुआ हाल ही में बीजेपी में शामिल हो गए हैं और अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने आजमगढ़ से चुनाव मैदान में उतर रहे हैं. दिनेश लाल यादव यूपी के गाजीपुर के गांव टंडवा के रहने वाले हैं. उनके भाई विजय लाल यादव मशहूर बिरहा गायक हैं. निरहुआ भी भोजपुरी सिनेमा से पहले बिरहा गायक थे. उनका बचपन बहुत कठिनाईयों में बीता. उनके पिता कोलकाता में काम करते थे और बहुत कम पगार में बड़े परिवार का खर्चा चलाते थे.

उनके उपनाम निरहुआ की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. 2004 में उनका एक एलबम रिलीज हुआ था जिसका नाम था- निरहुआ सटल रहे. ये एलबम जबरदस्त हिट रहा और इसी के बाद दिनेश लाल यादव ने अपने नाम के साथ निरहुआ जोड़ लिया

निरहुआ को यूपी सरकार यश भारती से भी सम्मानित कर चुकी है. बीजेपी में शामिल होने के बाद निरहुआ को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई है. दरअसल स्थानीय इंटेलीजेंस की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने उन्हें ये सुरक्षा दी है.

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