इंटरमीडिएट हो या दसवीं की परीक्षा का रिजल्ट, घर में ऐसा माहौल होता है कि एक बार पास तो सब कुछ बेमिसाल। आप अगर ऐसा सोच रहे हैं, तो यह बिल्कुल गलत हैं। इंटरमीडिएट का मतलब है कि Enter In life यानि जिंदगी की शुरुआत। बतौर छात्र आपके प्रोफेशनल करियर की एक शुरुआत है, लेकिन यह सब कुछ नहीं है। इंटरमीडिएट में अगर आप फेल हो जाते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि सब कुछ खत्म हो गया। आप खुद को फिर से एक मौका दे सकते हैं। वैसे भी कहते हैं न… ‘गिरने में बुराई नहीं है, बुराई है गिर कर पड़े रहने में’, इसलिए असफलता को पीछे छोड़ें और आगे बढ़ें।

खुद को दे सकते हैं एक और मौक
इंटरमीडिएट की परीक्षा किसी भी छात्र के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह आपके जीवन से बड़ी नहीं है। आपको समझना होगा कि यह एक शुरुआत है और आप दोबारा भी शुरुआत कर सकते हैं। आप जब ऐसे पड़ाव पर हों जब लगे कि आप सही शुरुआत नहीं कर पाए हैं, तो आप खुद को एक मौका और दे सकते हैं। आप देख सकते हैं कि कमी कहां रह गई, किस स्थान पर अभी और काम करना है।

फैसले लेने का समय
इंटरमीडिएट पास होने के बाद आपको अपनी दिशा तय करनी होती। आपको अपने प्रोफेशनल करियर को लेकर फैसला लेने की जरूरत होती है। जरूरी नहीं कि जिस तरफ आपका दोस्त या लोग जा रहे हो, आप भी उधर जाएं। आप खुद को समझ कर, अपनी काबिलयत के आधार पर फैसले ले सकते हैं। आज का दौर देखें तो इंजिनियरिंग, मेडिकल और मैनेंजमेंट एक आसानी से चुने जाने वाला फिल्ड है, लेकिन आप इससे इतर भी जा सकते हैं। आपकी रुचि अगर कहीं और है, तो आप उस दिशा का भी चुनाव कर सकते हैं।

दबाव में आने की जरूरत नहीं
परीक्षा में आप सफल हों या असफल दवाब में आने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। इंटरमीडिएट परीक्षा को लेकर तेलंगाना के मुख्‍यमंत्री केसीआर ने का कहना है कि इंटरमीडिएट परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है। परीक्षा में असफल होना जीवन में असफलता नहीं है। जीवन अनमोल है। आगे भी बहुत सारे अवसर मिलेंगे।

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