सर्वोच्च न्यायालय का मराठा आरक्षण पर रोक से इंकार

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नई दिल्ली, सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मराठा आरक्षण पर रोक लगाने से इंकार कर दिया और मराठाओं को नौकरियों और शिक्षा में दिए गए आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने बंबई उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आरक्षण पर पूर्वव्यापी प्रभाव के फैसले पर भी रोक लगा दी।

मराठा आरक्षण शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित याचिका के अंतिम परिणाम पर निर्भर होगा। 

अदालत ने पक्षकारों को और दस्तावेज दाखिल करने के लिए दो सप्ताह में नोटिस का जवाब देने का आदेश दिया।

न्यायालय ने यह रुख तब अपनाया है, जब वह मराठाओं के लिए शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में प्रवेश के लिए आरक्षण को समाप्त करने की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया और उसने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया।

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई, जिससे मराठाओं को नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण की अनुमति मिल गई थी।

बंबई उच्च न्यायालय ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) की श्रेणी के तहत मराठा समुदाय को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में दिए गए आरक्षण की वैधता को जून में बरकरार रखा था, लेकिन आरक्षण की मात्रा 16 प्रतिशत से घटा दी थी।

शिक्षा में प्रस्तावित आरक्षण को 16 प्रतिशत से 12 प्रतिशत और नौकरियों में 13 प्रतिशत से नीचे लाते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि उच्च आरक्षण ‘उचित नहीं’ है।

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