आतंकी साजिश के शक में युवकों की गिरफ्तारी के बाद यूपी पुलिस सतर्क

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कथित आतंकी साजिश में शामिल होने के शक में 6 राज्यों की पुलिस के संयुक्त अभियान में कुछ युवकों को हिरासत में लिए जाने और गिरफ्तार किए जाने के बाद यूपी पुलिस सतर्क हो गई है। पुलिस ने पश्चिमी यूपी के करीब 2,000 मदरसों और मस्जिदों पर निगरानी बढ़ा दी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस इस पट्टी के मदरसों और मस्जिदों पर निगाह रख रही है। बिजनौर के पुलिस अधीक्षक अजय सहनी ने बताया, ‘पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां बिजनौर और इसके आसपास के इलाकों में धार्मिक संस्थानों पर कड़ी नजर रखेगी। हम इन संस्थानों में जाने वाले इलाके के जिम्मेदार नागिरकों से भी सहायता मांग रहे हैं ताकि युवकों को भटकने से बचाया जा सके।’ अल्पसंख्यक विभाग के डेटा के अनुसार इस इलाके में करीब 500 मदरसे हैं जिनमें 15 डिग्री लेवल के हैं और 55 हाई स्कूल लेवल के हैं। इलाके के 1,500 मस्जिदों पर पुलिस नजर रख रही है। गौरतलब है कि गुरुवार को छह राज्यों में हुए पुलिस के संयुक्त अभियान में 19-25 वर्ष के चार युवकों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि आठ युवकों को हिरासत में लिया गया था। गिरफ्तार युवकों पर कथित रूप से दिल्ली और यूपी में आतंकी हमले की साजिश के आरोप हैं। 6 युवकों को यूपी एटीएस ने नोएडा के किसी अज्ञात स्थान पर पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया था। बिजनौर के पुलिस अधीक्षक अजय सहनी ने बताया कि शुक्रवार को पूछताछ के बाद इन युवकों को रिहा कर दिया गया जबकि एक स्थानीय मस्जिद के इमाम मोहम्मद फैजान को गिरफ्तार कर लिया गया है। ये गिरफ्तारियां बिजनौर, महाराष्ट्र के मुंब्रा, पंजाब के जालंधर और बिहार के पूर्वी चंपारण से हुई थीं। पुलिस ने हिरासत में लिए गए छात्रों को भटका हुआ बताया। ये अलग-अलग मदरसों में पढ़ते थे। उधर हिरासत से छोड़े गए युवकों के परिजन खुश हैं। जेल में जीवन बर्बाद हो जाने के डर से चिंतित घरवालों को जब बच्चे वापस मिल गए तो उनकी आंखों से आंसू छलक आए। छोड़े गए युवकों में 5 बिजनौर के, जबकि एक शामली का है। इनमें से अधिकांश मदरसों में पढ़ते हैं। एटीएस अधिकारियों के अनुसार, इन युवकों के खिलाफ ऐसे सबूत नहीं थे जिनसे इन्हें आतंकी माना जा सके। यह सिर्फ गुमराह नौजवान हैं। ऐसे में इनका सुधार करके मुख्य धारा में लाने की कोशिश की जा रही है जिससे समाज में पुलिस और व्यवस्था के प्रति इनका विश्वास बढ़े। अगर जरूरत पड़ी, तो इनके लिए स्किल डिवेलपमेंट कोर्स भी करवाया जाएगा जिससे ये मुख्य धारा से जुड़ सकें और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकें। अधिकारियों के अनुसार, एटीएस बिल्कुल नहीं चाहती है कि गुमराह युवाओं को आतंकियों की कैटिगरी में रखा जाए। परिजनों को बच्चों पर ध्यान देने को कहा गया है। साथ ही एटीएस भी इन पर नजर रखेगी।

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