बगैर रजिस्ट्रेशन कराए सैकड़ों छात्रों ने दे दिया एग्जाम

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पटना.बिना रजिस्ट्रेशन के ही छात्रों ने स्नातक (ग्रेजुएशन) की परीक्षा दी थी। अनुदान राशि पाने के लिए कॉलेजों ने फर्जीवाड़े का यह फॉर्मूला आजमाया, जिसे अंजाम तक पहुंचाने में जेपी यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी अहम रोल निभाया। कई वर्षों तक धांधली का यह रास्ता अपनाया गया। आलम यह था कि गोपालगंज के एसएमडी कॉलेज (जलालपुर) ने बीते एक दशक यानी 10 वर्षों (2005-14) में कुल 542 छात्रों को बिना रजिस्ट्रेशन कराए ही स्नातक के इम्तिहान में शामिल करा दिया था। जेपी यूनिवर्सिटी के 8 कॉलेजों में हुए करोड़ों के अनुदान राशि की घोटाले की निगरानी जांच में यह हकीकत सामने आई है। जांच एजेंसी की तफ्तीश के दायरे में देवराहा बाबा डिग्री कॉलेज (गड़खा), डॉ. पीएन सिंह डिग्री कॉलेज (छपरा), लोक महाविद्यालय (बनियापुर), विशेश्वर दयाल महिला कॉलेज (छपरा), दारोगा प्रसाद राय डिग्री कॉलेज (सिवान), मजहरूल हक डिग्री कॉलेज (सीवान), एसएमडी कॉलेज (गोपालगंज) आैर पूर्वोत्तर रेलवे कॉलेज (सोनपुर) है। सूत्रों के मुताबिक एसएमडी कॉलेज समेत आधा दर्जन कॉलेजों में इस तरह की गड़बड़ी सामने आई है। इसमें सैकड़ों छात्रों को गलत तरीके से परीक्षा में शामिल करने का पता चला है। बहरहाल निगरानी ब्यूरो की अलग-अलग टीमें हर पहलू को खंगाल रही है। गौरतलब है कि निगरानी ने जेपी यूनिवर्सिटी छपरा के दो पूर्व वीसी समेत आधा दर्जन से अधिक यूनिवर्सिटी के तत्कालीन पदाधिकारियों के खिलाफ राज्यपाल से अभियोजन की स्वीकृति की मांग पहले ही कर रखी है। इनमें पूर्व वीसी द्विजेंद्र गुप्ता व लोकेश चंद्र प्रसाद के अलावा तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. अशोक कुमार, डॉ. गुलाम मुस्तफा, डॉ. तपस्वी प्रसाद सिंह, डॉ. विजय प्रताप कुमार, एग्जामिनेशन कंट्रोलर डॉ. दिव्यांशु कुमार, फाइनांस अफसर राजकिशोर सिंहा व अन्य शामिल हैं। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से इस बाबत राज्यपाल के प्रधान सचिव को पत्र भेजा था। निगरानी की कार्रवाई से साफ है कि जांच में आरोप सही साबित हुए हैं। दरअसल परीक्षा में छात्रों की सफलता के आधार पर कॉलेजों को सरकारी अनुदान राशि मिलती है। इसके अलग-अलग पैमाने है। छात्र, छात्रा व डिवीजन आदि के आधार पर अनुदान की राशि का भुगतान होता है। ऐसे में अनुदान की मोटी राशि डकारने के लिए कॉलेजों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन की मिलीभगत से नियम-कानून को ताक पर रख कर अधिक से अधिक छात्रों का भविष्य दांव पर लगाते हुए उन्हें अवैध तरीके से परीक्षा में शामिल करा दिया था। बाद में उन परीक्षार्थियों का रिजल्ट भी नहीं निकल सका था। फर्जीवाड़े के इस ब्लैक गेम में जेपी यूनिवर्सिटी (छपरा) के तत्कालीन रजिस्ट्रार से लेकर एग्जामिनेशन कंट्रोलर तक जांच के घेरे में हैं। इनमें दो एग्जामिनेशन कंट्रोलर गोपाल प्रसाद आर्या व दिव्यांशु कुमार के अलावा तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. गुलाम मुस्तफा, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. तपस्वी प्रसाद सिंह, डॉ. विजय प्रताप कुमार व अन्य शामिल हैं। देवराहा बाबा डिग्री कॉलेज के सचिव श्रीधर दास ने हाइकोर्ट में मामला दायर करते हुए आरोप लगाया था कि प्रभारी पद से हटाए गए प्रिंसिपल को तत्कालीन वीसी ने अवैध तरीके से वापस प्रभारी प्रिंसिपल बना कर सरकारी अनुदान की राशि का घपला-बंदरबांट किया गया था। आरोप डीबीडी कॉलेज के प्रिंसिपल रहे अर्जुन प्रसाद से जुड़ा था, जिनके खिलाफ करोड़ों के गबन का मामला पहले से दर्ज होने के बावजूद एक माह के लिए प्रिंसिपल की कुर्सी दोबारा मिली थी। सुनवाई के दौरान जिले के अन्य कॉलेज (अनुदानित) भी जांच के लपेटे में आ गए।

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