सीपीईसी पर भारत की चिंता को चीन ने किया खारिज, पंचशील समझौता का दिया हवाला

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बीजिंग: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरने वाली 50 अरब डॉलर की सीपीईसी परियोजना का नाम बदलने के संदर्भ में पूछे गए सवालों को टालते हुए चीन ने गुरुवार (18 मई) को कहा कि वह एक दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के लिए परस्पर सम्मान के पंचशील के सिद्धांतों में विश्वास करता है. विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग से जब यह सवाल किया गया कि क्या नयी दिल्ली में चीनी राजदूत के प्रस्ताव के मुताबिक चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना का नाम बदलने की कोई योजना है तो उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘सीपीईसी पर हमने स्थिति स्पष्ट कर दी है.’ उनसे सीपीईसी के संदर्भ में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता द्वारा लिखे गए लेख के बारे में भी सवाल किए गए थे.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस बात को दोहराना चाहता हूं कि हम दूसरे देशों के साथ अपने मित्रवत संबंधों में सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों (पंचशील) का अनुसरण करना चाहेंगे.’ भारत और चीन ने 1954 में पंचशील का पहला सिद्धांत दिया था जिसके अनुसार दोनों देश एक दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करते हैं.

हुआ ने कहा, ‘‘मुझे पूरा भरोसा है कि आपने बेल्ट एंड रोड फोरम की बैठक के दौरान इसका संज्ञान लिया होगा कि राष्ट्रपति चिनफिंग ने इसका उल्लेख किया कि हम मित्रतापूर्ण सहयोग को बढ़ावा देने के लिए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांत का अनुसरण करते हैं. इसलिए मेरा मानना है कि इस तरीके से भारतीय पक्ष की चिंताओं का निदान होना चाहिए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीर क्षेत्र के संदर्भ में हम पहले ही कह चुके हैं कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच का मुद्दा है. बेल्ट एंड रोड से कश्मीर मुद्दे पर चीन के रूख में बदलाव नहीं आने वाला है. बेल्ट एंड रोड खुला और समावेशी है.’’

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