अमीरों की एलपीजी सब्सिडी छीनेगा आर्थिक संपन्नता का पैमाना!

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नई दिल्ली। मोदी सरकार का अब पूरा फोकस गरीबों पर है। इसी के मद्देनजर आर्थिक संपन्नता का पैमाना तैयार किया जा रहा है, जिसके आधार पर आर्थिक रूप से संपन्न लोगों से एलपीजी यानी रसोई गैस सिलिंडर की सब्सिडी वापस ली जाएगी। सब्सिडी वाला सिलिंडर गरीबों को ही मिलेगा। इसके अलावा सरकार जल्द ही पूरे देश में पेट्रोल और डीजल के मूल्यों की समीक्षा करेगी। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम रोजाना तय किए जा सकेंगे। यह बात पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एनबीटी से विशेष बातचीत में कही। मौजूदा समय में दिल्ली में गैर सब्सिडी वाले सिलिंडर की कीमत 631 रुपये और सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलिंडर की कीमत 442 रुपये है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार ने स्वेच्छा से रसोई गैस सब्सिडी छोड़ने का अभियान चला रखा है। इसमें काफी कामयाबी भी मिली है। सरकार चाहती है कि गरीबों को ज्यादा संख्या में सब्सिडी का लाभ मिले और उन्हें रसोई गैस का कनेक्शन मिले। इसके लिए जरूरी है कि आर्थिक रूप से संपन्न तबके से सब्सिडी की सुविधा वापस ली जाए। बचत का इस्तेमाल सब्सिडी मेंः हालांकि धर्मेंद्र प्रधान ने माना कि आर्थिक संपन्नता का मानदंड तय करना मुश्किल है, फिर भी जल्द ही इस काम को अंतिम रूप दिया जाएगा और इसकी घोषणा की जाएगी। यह काम देश और गरीबों के हित में है। आर्थिक रूप से संपन्न से लोगों से सब्सिडी वापस लेने के बाद जो बचत होगी, उसका इस्तेमाल गरीबों को रसोई गैस कनेक्शन देने और सिलिंडर पर सब्सिडी देने में किया जाएगा। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अब पूरे देश में पेट्रोल और डीजल के मूल्यों की रोजाना समीक्षा शुरू की जाएगी। फिलहाल जिन शहरों में इसे प्रायोगिक तौर पर आरंभ किया गया है, वहां काफी सफलता मिली है। इस संबंध में जो तकनीकी मुश्किलें सामने आ रही है, तेल कंपनियों के साथ बैठकर उनका समाधान किया जाएगा। गेमचेंजर है उज्जवला स्कीमः पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि उज्जवला स्कीम गेमचेंजर साबित हुई है। इस स्कीम के तहत अब तक करीब 2 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त में एलपीजी कनेक्शन दिया गया है। सरकार का लक्ष्य इसका फायदा 5 करोड़ परिवारों को दिलाना है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कुछ योजनाओं को राजनीति से दूर रखना चाहिए। यह योजना गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले ऐसे लोगों के लिए है, जिनके पास गैस कनेक्शन और चूल्हा लेने के लिए भी पैसे नहीं है। ऐसे लोगों को सही मायने में सब्सिडी देने की जरूरत है। इस तरह जुटाया डेटाः पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इनकम टैक्स, आधार नंबर और बैंक खातों के ट्रांजेक्शन के आधार पर लोगों की आमदनी का डेटा जुटाया गया है। एक बार आर्थिक संपन्नता का पैमाना तय होने के बाद फिर डीलरों को इसकी जानकारी दी जाएगी। क्षेत्रवार उन लोगों के नाम डीलरों को भेजे जाएंगे, जो आर्थिक संपन्नता के दायरे में आते हैं। इसके बाद डीलर उन्हें सूचना दे देंगे कि उनसे सब्सिडी वापस ली जा रही है।

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