सुषमा ने पैरिस समझौते पर ट्रंप के आरोप को नकारा, कश्मीर मसले पर पाकिस्तान को दो टूक

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मोदी सरकार के 3 साल पूरा होने पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने मंत्रालय के कार्यों का लेखा-जोखा पेश किया। सुषमा स्वराज ने यूपीए के अंतिम 3 साल और मोदी सरकार के 3 साल के कार्यकाल की तुलना करते हुए दावा किया कि उनकी सरकार ने विदेशी फ्रंट से लेकर घरेलू मोर्चे तक शानदार काम किया। पैरिस समझौते से अलग होते वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की भारत विरुद्ध टिप्पणी को गलत बताते हुए सुषमा ने कहा कि भारत ने किसी लालच या दबाव में पैरिस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए थे और हम इसका हिस्सा बने रहेंगे।
‘कश्मीर पर तीसरा पक्ष मंजूर नहीं’
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ अपने सभी मामले द्विपक्षीय आधार पर हल करना चाहता है, लेकिन वार्ता और आतंकवाद दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते। कश्मीर का मुद्दा द्विपक्षीय है। भारत-पाक बातचीत में तीसरा पक्ष मंजूर नहीं है। नवाज ने अपने जन्मदिन पर पीएम को बुलाया था और न्यौते का सम्मान करते हुए पीएम वहां गए। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ के बीच बैठक की संभावना पर उन्होंने कहा कि इसको लेकर दोनों पक्षों की ओर से कुछ भी तय नहीं है।
‘चीन के सामने उठाया जाएगा वायुसीमा उल्लंघन का मसला’
स्वराज ने कहा, ‘भारत चाहता है कि एनएसजी में उसकी सदस्यता का समर्थन करने वाले देश चीन के समर्थन के लिए चीनी नेताओं से बात करें। हमने चीन की ‘एक बेल्ट एक रोड’ परियोजना का विरोध भारत की संप्रभुता के चलते किया।’ चमोली जिले में भारतीय वायुसीमा में चीनी हेलिकॉप्टरों के आने पर सुषमा ने कहा, भारत चीन के समक्ष वायुसीमा उल्लंघन का मामला उठाएगा।

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