पीएसयू बैंक के एक और एकीकरण को मार्च तक मंजूरी दे सकती है सरकार

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नई दिल्ली
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ग्रुप के बैंकों के सफल एकीकरण से उत्साहित वित्त मंत्रालय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू) के बीच विलय-अधिग्रण के इस तरह के एक और प्रस्ताव को इस वित्त वर्ष में ही मंजूरी देने पर विचार कर रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा,’एकीकरण तो होना ही… लेकिन इस बारे में कोई भी फैसला सोच-समझकर ही लिया जाएगा। अगर एनपीए की स्थिति सुधरी तो मौजूदा वित्त वर्ष के आखिर तक एक ओर विलय हो सकता है।’

मंत्रालय पीएसयू बैंकों के सुदृढ़ीकरण या एकीकरण के जरिए देश में 4-5 वैश्विक आकारवाले बैंक बनाना चाहता है। अधिकारी ने कहा कि बहुत कमजोर बैंक को किसी मजबूत बैंक के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए क्योंकि कमजोर बैंक मजबूत बैंक को भी नीचे ला सकता है। उन्होंने कहा, ‘कुछ कमजोर बैंक हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े बैंक दक्षिणी क्षेत्र के कुछ बैंकों, मसलन इंडियन ओवरसीज बैंक, का अपने में विलय कर सकता है। इसी तरह देना बैंक को दक्षिणी भारत के किसी बड़े बैंक के साथ मिलाया जा सकता है।’

गौरतलब है कि पांच सहयोगी बैंकों एवं भारतीय महिला बैंक का एसबीआई में विलय एक अप्रैल 2017 को प्रभावी हो गया। इससे एसबीआई दुनिया के 50 शीर्ष बैंकों में शामिल हो गया। वित्त मंत्रालय अब इस मॉडल को अन्य पीएसयू बैंकों में भी लागू करना चाहता है ताकि भी वैश्विक स्तर पर बड़े बैंकों में शामिल हो सकें।

दरअसल, सार्वजनिक बैंकों का फंसा कर्ज अप्रैल दिसंबर 2016-17 में एक लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा बढ़कर 6.06 लाख करोड़ रुपये हो गया। वित्त मंत्री अरुण जेटली कई मौकों पर कह चुके हैं कि भारत को वैश्विक आकार के 5-6 बैंकों की जरूरत है।

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