केयर्न टैक्स विवाद: आयकर विभाग ने 2000 करोड़ का डिविडेंड, रिफंड जब्त किया

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इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। डिविडेंड और टैक्स रिफंड के मद में कंपनी की 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जब्त कर ली गई है। विभाग ने पिछली तारीख से लगाए गए 10247 करोड़ रुपये के टैक्स का कुछ हिस्सा रिकवर करने के लिए ऐसा किया। इससे पहले ब्रिटिश फर्म एक इंटरनैशनल आर्बिट्रेशन ट्राइब्यूनल में भारत के टैक्स डिपार्टमेंट के खिलाफ मुकदमा हार गई थी। कंपनी ने बकाया टैक्स वसूली के विभाग के ऐक्शन को चुनौती दी थी।

एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया कि विभाग ने पहले ही टैक्स रिफंड के रूप में 1500 करोड़ रुपये की वह रकम मूलधन में अजस्ट कर ली है, जो केयर्न एनर्जी पीएलसी को दी जानी थी।

16 जून को डिपार्टमेंट ने इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 226(3) के तहत कंपनी की पुरानी सब्सिडियरी केयर्न इंडिया लिमिटेड (अब यह वेदांता इंडिया लिमिटेड है) को नोटिस भेजा था, जिसमें कहा गया था कि डिविडेंड के रूप में ब्रिटिश फर्म को जो भी रकम देय हो, उसे सरकार के पास ट्रांसफर किया जाए।

सूत्र ने बताया कि पिछला और मौजूदा डिविडेंड मिलाकर करीब 650 करोड़ रुपये कंपनी को दिया जाना है। उन्होंने कहा कि यह रकम सरकारी खजाने में आज-कल में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

इसके बाद अब डिपार्टमेंट उस 9.8 पर्सेंट रेजिडुअल स्टेक को लेने का कदम बढ़ाएगा, जो केयर्न इंडिया में केयर्न एनर्जी के पास है। केयर्न एनर्जी ने केयर्न इंडिया को वेदांता के हाथ बेचा था, लेकिन उसमें अब भी उसके पास 9.8 पर्सेंट स्टेक है।

असेसिंग ऑफिसर इनकम टैक्स (सर्टिफिकेट प्रोसिडिंग्स) रूल्स 1962 के तहत एक सर्टिफिकेट तैयार कर रहे हैं ताकि टैक्स रिकवर किया जा सके। इसके मुताबिक टैक्स रिकवरी ऑफिसर कदम बढ़ाएंगे और उन शेयरों को अटैच कर बेच देंगे।

सूत्र ने बताया कि हालांकि यह बिक्री शायद तत्काल न हो क्योंकि टैक्स डिपार्टमेंट अच्छी से अच्छी कीमत पाने के लिए इंतजार करेगा। उन्होंने बताया कि इन शेयरों को एलआईसी या वेदांता में से जो भी अच्छी कीमत देगा, उसके हाथ बेचा जा सकता है।

टैक्स डिपार्टमेंट ने 31 मार्च को केयर्न एनर्जी के नाम नोटिस जारी कर उससे 10247 करोड़ रुपये का टैक्स पेमेंट करने को कहा था। विभाग ने इस पेमेंट के लिए 15 जून की डेडलाइन तय की थी। उस नोटिस के बाद केयर्न एनर्जी ने टैक्स ट्राइब्यूनल आईटीएटी में अपील की थी।

आईटीएटी ने मार्च में फैसला दिया था कि 2006 में ब्रिटिश कंपनी की ओर से नवगठित इंडियन यूनिट केयर्न इंडिया को कुछ पैसों के बदले किए गए शेयर ट्रांसफर पर पिछली तारीख से टैक्स लगाना उचित है।

केयर्न एनर्जी ने ईमेल से दिए गए बयान में टैक्स डिपार्टमेंट के ताजा कदम की पुष्टि की। कंपनी ने हालांकि कहा कि वह पिछली तारीख से टैक्स डिमांड के खिलाफ इंटरनेशनल आर्बिटेशन जारी रखेगी।

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