बाजल नॉर्म्स पर बैंकों को RBI से मिल सकती है राहत

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नई दिल्ली

बैड लोन की बड़ी समस्या से जूझ रहे सरकारी बैंकों के लिए इंटरनेशनल कैपिटल नॉर्म्स के पूरी तरह पालन की समयसीमा बढ़ाने की संभावना पर सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के बीच विचार-विमर्श चल रहा है। बैंकों को मार्च 2019 तक बाजल III रेगुलेटरी नॉर्म्स का पालन करना है। RBI की ओर से जारी बाजल III गाइडलाइंस के तहत, भारतीय बैंकों को 2019 तक 8 पर्सेंट मिनिमम कॉमन इक्विटी रेशियो और 11.5 पर्सेंट की टोटल कैपिटल रेशियो रखना होगा। फाइनेंस मिनिस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मुद्दे पर कुछ बातचीत हुई है और RBI भी इसमें कुछ राहत दे सकता है। उनका कहना था कि RBI बैंकों की मदद करेगा क्योंकि नए नॉर्म्स के तहत उन्हें अब बैड लोन्स से निपटना होगा। अधिकारी के मुताबिक, ‘इसे भारत के नजरिए से भी देखना होगा, जहां RBI ने बाजल III की तुलना में पहले ही अधिक कड़े नॉर्म्स लागू किए हैं।’ उन्होंने बताया कि कुछ बड़े देश पहले ही इन ग्लोबल बैंकिंग रेगुलेटरी नॉर्म्स को पूरी तरह लागू करने को टालने पर विचार कर रहे हैं। इस बारे में RBI को भेजी गई ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला।

मार्च 2017 तक सरकारी बैंक 8.5 पर्सेंट की एवरेज कॉमन एक्विटी रेशियो रख रहे थे। हालांकि, कुछ सरकारी बैंकों के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं और उनकी स्थिति सुधारने के लिए RBI कदम उठाने पर विचार कर रहा है। RBI के अनुमान के अनुसार, सरकारी बैंकों को 2019 तक ये नॉर्म्स पूरे करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी, जबकि पूरे बैंकिंग सेक्टर को इसके लिए 5 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त कैपिटल चाहिए। नॉर्म्स पूरे करने की डेडलाइन बढ़ने से बैंक बैड लोन्स से निपटने और कैपिटल जुटाने के संघर्ष के साथ अधिक कर्ज दे सकेंगे। मार्च, 2017 के अंत तक बैंकों के बैड लोन बढ़कर 7.4 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गए थे, जो एक वर्ष पहले 7 लाख करोड़ रुपये के थे। बैंकों के लिए जरूरी कैपिटल जुटाना आसान नहीं होगा और इससे उनकी कर्ज देने की क्षमता पर असर पड़ेगा।

रेटिंग एजेंसी मूडीज ने एक रिपोर्ट में कहा था कि 11 सरकारी बैंकों को बाजल III नॉर्म्स को पूरा करने के लिए 70,000-95,000 करोड़ रुपये की एक्सटर्नल इक्विटी कैपिटल की जरूरत होगी। सरकार ने 2018-19 तक सरकारी बैंकों को कैपिटल देने के लिए केवल 20,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है। फाइनेंस मिनिस्ट्री का मानना है कि कुछ छूट मिलने से बैंकों की फाइनेंशियल पोजिशन बेहतर हो सकती है। RBI ने 2014 में देश में बाजल III कैपिटल रेगुलेशंस को पूरी तरह लागू करने की अवधि एक वर्ष के लिए बढ़ाने पर सहमति दी थी।

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