विजय माल्या को बैंक ऋण का सम्मान करने का कोई इरादा नहीं था- सीबीआई

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नई दिल्ली । सीबीआई ने किंगफिशर के प्रमुख विजय माल्या द्वारा एक ईमेल का हवाला देते हुए अपने आरोप पत्र में कई बातों का खुलासा किया है। आरोपपत्र में कहा गया है कि, किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमुख विजय माल्या को आईडीबीआई बैंक को दी गई व्यक्तिगत गारंटी का सम्मान करने का कोई इरादा नहीं था, यहां तक कि, अब तक वे मौजूदा 900 करोड़ रुपये के ऋण की डिफ़ॉल्ट में शामिल हैं। माल्या, किंगफिशर एयरलाइंस के अधिकारी और आईडीबीआई बैंक के खिलाफ पिछले हफ्ते मुंबई अदालत में सीबीआइ ने आरोप पत्र दायर किये। सीबीआई ने 6 जनवरी 2012 को माल्या द्वारा यूएसएल के एक वरिष्ठ अधिकारी पी.ए. मुरली को भेजे गए ईमेल की प्रति के साथ अपने आरोप के समर्थन की मांग की है।

माल्या की कथित ई-मेल से कहा गया है, ” मेरे खाते से 10 करोड़ रुपये यूएसएल के खाते में ही कल ही डाल लिया जाए। आरोपपत्र में, सीबीआई ने कहा है कि किंगफिशर एयरलाइंस के ब्रांड वैल्यू को अपने लोन के संरक्षण के लिए उपयोग करने का विचार माल्या का ही था, जिसे यूबी ग्रुप के तत्कालीन सीएफओ रवि नेदुंगदी को 10 सितंबर, 2008 को एक ईमेल में सुझाव दिया गया था। सीबीआई के अनुसार, एक साल बाद 2009 में, माल्या ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को ऋण सुरक्षा के लिए 3,365 करोड़ रुपये में किंगफिशर एयरलाइंस के ब्रांड वैल्यू की पेशकश की बात की थी।”

एजेंसी ने आरोप लगाया कि माल्या ने आईडीबीआई बैंक से ऋण की मांग करते हुए कहा कि किंगफिशर दो स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा किए गए ब्रांड वैल्यूएशन रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, लेकिन अंततः केवल एक ही आवेदन दिया, जो उनकी कंपनी के लिए अनुकूल था। जांच में आगे यह पता चला है कि आरोपी विजय माल्या ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट के निष्कर्षों के बारे में अच्छी तरह वाकिफ थे। इस रिपोर्ट की पावर प्वाइंट प्रस्तुति अकेले ही ब्रांड फाइनेंस टीम द्वारा बनाई गई थी। 20 दिसंबर 2008 को मुंबई निलादरी स्थित उनके निवास पर उन्होंने इस बात को लेकर असंतोष व्यक्त किया था। सीबीआई ने आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट जानबूझकर छुपाई गई थी।

सीबीआई ने आरोपपत्र में दावा किया है कि 2010 से 2012 तक एसबीआई को संपत्ति का ब्योरा देते समय उन्होंने जानबूझकर दक्षिण अफ्रीका की संपत्ति, UNB में अपनी हिस्सेदारी सहित किसी भी विदेशी संपत्ति को घोषित नहीं किया। सीबीआई के अनुसार, जब माल्या ने अंततः सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप पर अपनी विदेशी संपत्ति की घोषणा की, तब भी उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में 49.75 करोड़ रुपये की वीजेएम रिजॉर्ट्स की संपत्ति और यूएनबी-दक्षिण अफ्रीका में 100 फीसदी हिस्सेदारी की 746.25 करोड़ रुपये की संपत्ति को छुपा लिया।

सीबीआई ने दावा किया है कि माल्या ने 14 फरवरी, 2013 को एसबीआई अध्यक्ष के साथ पत्राचार में कहा था कि यूबी ग्रुप किंगफिशर एयरलाइंस बैंक कंसोर्टियम को यूएसएल सौदे पर दीजियो से प्राप्त आय से भुगतान करेगा।
हालांकि, एजेंसी ने दावा किया है कि बैंकों से छुपाछुपी के गेम के खुलासा होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ 2016 में अवमानना कार्यवाही शुरू की। सीबीआई ने कहा है कि माल्या ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर एक हलफनामे में स्वीकार किया कि 26 फरवरी और 29 फरवरी को अपने तीनों बच्चों के समान लाभ के लिए उन्होंने 40 मिलियन डॉलर अलग-अलग ट्रस्टों में जमा किया था। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अवमानना का दोषी करार देते हुए 10 जुलाई को कोर्ट मे पेश होने का निर्देश दिया।

सीबीआई ने यह भी दावा किया है कि कोर्ट में माल्या के द्वारा हर तरह की गलत सूचना दी गई है। एजेंसी के अनुसार, किंगफिशर एयरलाइंस ने बार-बार आईडीबीआई बैंक को आश्वासन दिया कि वे के जरिए 600 करोड़ रुपये के प्रमोटरों के योगदान और अतिरिक्त 400 करोड़ डॉलर के रणनीतिक निवेशकों का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं किया। यह कहा गया है कि माल्या ने 25 मार्च 2009 को बैंकों को लिखे एक पत्र में आगे के ऋणों के भुगतान करने के लिए लिखा। सीबीआई ने यह भी दावा किया है कि जब माल्या ने दो सूचीबद्ध कंपनियों में संपत्ति की घोषणा की तो उनके मूल्यों में तेजी आई।

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