इस्तीफा नहीं हुआ तो बर्खास्तगी के विकल्प पर भी मंथन

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उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने अगर दो-तीन दिनों में इस्तीफा नहीं दिया तो उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त भी किया जा सकता है। जदयू के स्तर पर इस विकल्प पर मंथन चल रहा है। बर्खास्तगी को मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीतिक शुचिता के प्रश्न पर जदयू विधायकों व पदाधिकारियों की बैठक में पिछले दिनों काफी ठोस अंदाज में अपनी बात रख चुके हैैं। पार्टी के स्तर पर भी इस स्टैैंड को समर्थन हासिल है। जदयू सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राजद नेतृत्व को यह संदेश भिजवा दिया गया है कि राजनीतिक शुचिता को ध्यान में रख तेजस्वी प्रसाद यादव को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। इसके बाद भी राजद के वरिष्ठ नेताओं और खुद तेजस्वी प्रसाद यादव ने कई बार यह दोहराया कि इस्तीफा नहीं होगा। जदयू का कहना है कि राजद की ओर से मंत्री के रूप में तेजस्वी यादव के कामकाज की बात हो रही है। भ्रष्टाचार के मसले पर ठोस तरीके से तथ्यात्मक बातें नहीं रखी गयी हैैं। जदयू नेताओं से जब इस संबंध में पूछा गया कि तेजस्वी प्रसाद यादव की बर्खास्तगी की स्थिति में महागठबंधन का क्या होगा तो इस बाबत जदयू के दिग्गजों ने कहा कि महागठबंधन चलाना केवल जदयू की जिम्मेवारी नहीं है। इसके लिए तो महागठबंधन के सभी घटक दलों को काम करना है।
बर्खास्तगी का तर्क : तेजस्वी की बर्खास्तगी के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि नीतीश कुमार की इमेज रही है कि उन्हें भ्रष्टाचार का आरोपी बर्दाश्त नहीं। वे जदयू विधायकों की बैठक में पूरी बात कह चुके हैं। यही नहीं इस्तीफे के कई दृष्टांत पर भी बात की थी। यह बात सामने आने के बाद भी तेजस्वी प्रसाद ने इस्तीफे से इनकार किया। ऐसे में राजनीतिक शुचिता की बात आगे कर यह कहा जा रहा कि दो विचारधारा का एक साथ चल पाना संभव नहीं।

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