कानपुर से रायसीना हिल का सफर है बेहद खास!

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रामनाथ कोविंद देश 14वें राष्‍ट्रपति चुन लिए गए हैं. उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार मीरा कुमार को 65 प्रतिशत से अधिक वोट से हराया.रामनाथ कोविंद का जन्म कानपुर देहात की डेरापुर तहसील के गांव परौंख में 1 अक्टूबर 1945 को हुआ. कोविन्द दलित समुदाय से आते हैं. कोविंद ने वकालत की डिग्री लेने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की. वह 1977 से 1979 तक दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे. कोविंद 1998 से 2002 तक बीजेपी दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं. वह ऑल इंडिया कोली समाज के भी प्रेसिडेंट रहे. उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर भी काम किया है. 8 अगस्त 2015 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया था. स्‍नातक डिग्री हासिल करने के बाद सिविल सर्विसेस परीक्षा दी. पहले और दूसरे प्रयास में नाकाम रहने के बाद तीसरी बार में उन्‍होंने कामयाबी हासिल की. कोविंद ने आईएएस जॉब इसलिए ठुकरा दिया क्‍योंकि मुख्‍य सेवा के बजाय उनका एलाइड सेवा में चयन हुआ था. वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वे तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई के निजी सचिव भी रहे. बाद में वे बीजेपी से जुड़े. पार्टी की टिकट से वे दो बार चुनाव भी लड़ चुके हैं लेकिन दुर्भाग्‍य से दोनों ही बार उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा. कोविंद वर्ष 1991 में बीजेपी में शामिल हुए. पार्टी के प्रवक्‍ता का पद भी उन्‍होंने संभाला है. कोविंद बीजेपी के दलित मोर्चे के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं. कुष्‍ठ रोगियों के लिए काम करने वाली संस्‍था दिव्‍य प्रेम सेवा मिशन के कोविंद संरक्षक हैं. उच्‍च सदन राज्‍यसभा में 12 वर्ष तक कोविंद बीजेपी का प्रतिनिधित्‍व कर चुके हैं. वर्ष 1994 में पहली बार राज्‍यसभा के लिए चुने गए थे. उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं. 2015 में बिहार के राज्‍यपाल चुने गए. इस दौरान राज्‍य के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के साथ बेहतर तालमेल रहा. यही वजह रही कि जब एनडीए ने राष्‍ट्रपति पद के लिए कोविंद की उम्‍मीदवारी की घोषणा की तो नीतीश कुमार ने बेझिझक उनको समर्थन देने की घोषणा की.

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