कोर्ट ने कहा : पंढेर-कोली को जीवित रहने का अधिकार ही नहीं

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निठारी कांड के 8वें केस में सोमवार को सीबीआई कोर्ट ने 114 पेज का फैसला सुनाते हुए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को फांसी की सजा सुना दी। इस दौरान कोर्ट ने कोली पर 35 हजार और पंढेर पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। न्यायाधीश पवन तिवारी ने कहा कि दोनों अभियुक्तों ने युवती से रेप का प्रयास किया और चुन्नी से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। साथ ही, शव के टुकड़े-टुकड़े करके उसे पॉलीथिन में भरकर नाले में फेंक दिया। यह अपराध अमानवीय, पाश्विक, क्रूर व जघन्यतम श्रेणी का है। ऐसे अपराधियों को जीवित रहने का अधिकार ही नहीं है। इन्हें तब तक फांसी पर लटकाकर रखा जाए, जब तक इनकी मृत्यु नहीं हो जाती। बता दें कि निठारी कांड के 8वें केस में एक युवती को नौकरी दिलाने के नाम पर कोठी में बुलाकर रेप का प्रयास करने व चुन्नी से गला घोंटकर उसकी हत्या करने के आरोप में सीबीआई कोर्ट ने कोली और पंढेर को 22 जुलाई को दोषी करार दिया था।
इन धाराओं में मिली सजा
सुरेंद्र कोली
302 में फांसी और 10 हजार रुपये का जुर्माना।
364 में उम्रकैद और 10 हजार रुपये का जुर्माना।
376/511 में 10 साल की कैद और 10 हजार रुपये का जुर्माना।
201 में 7 साल की कैद और 5 हजार रुपये का जुर्माना।
मोनिंदर सिंह पंढेर
302 व सहपठित धारा 120बी में फांसी और 10 हजार रुपये का जुर्माना।
376/511 व सपठित धारा 120बी में 7 साल की कैद और 10 हजार रुपये का जुर्माना।
201 व सपठित धारा 120बी में 7 साल की कैद और 5 हजार रुपये का जुर्माना।

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