राज्यसभा चुनाव में होगा NOTA का इस्तेमाल, टाइमिंग पर भड़की कांग्रेस

0
785

राज्यसभा चुनाव में चुनाव आयोग द्वारा नोटा के ऑप्शन को शामिल करने को लेकर उच्च सदन में कांग्रेस पार्टी ने हंगामा कर दिया है. उन्होंने इस पर कई सवाल खड़े कर दिए. प्रश्नकाल में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने इस मसले को उठाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को इसके बारे में पता ही नहीं था और चुनाव आयोग ने नोटिफिकेशन के दौरान ऐसी कोई जिक्र नहीं किया. इसके चलते सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करना पड़ा. इस पर जवाब देते हुए राज्यसभा के नेता अरुण जेटली ने इस मसले को यह कहकर खारिज कर दिया कि यह तो चुनाव आयोग का विशेष अधिकार है. जाहिर है राज सभा चुनाव में गुजरात को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच तलवारें खिंची हुई है. राज्यसभा की तीसरी सीट से कांग्रेस सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल की राज्यसभा में वापसी की पुरजोर कोशिश कर रही है. वही भाजपा इस सीट पर सेंधमारी में जुटी है. नोटा के ऑप्शन पर कांग्रेस पार्टी को सब कुछ ठीक नहीं लग रहा है. इस पर अहमद पटेल ने को ट्वीट करते हुए कहा कि पहले तो राज्यसभा के चुनाव की तारीख आगे बढ़ा दी गई और उसके बाद नोटिफिकेशन के बाद नोटा लाने की वजह क्या है, यह चुनाव आयोग को ही मालूम है.
चुनाव आयोग का फैसला कानून की किताब में खरा नहीं
कांग्रेस के राज सभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी चुनाव आयोग की टाइमिंग पर सवाल खड़े किए. उनका मानना है कि यह फैसला कानून की किताब में खरा नहीं बैठता. ये नोटा हो रहा है कि पोटा हो रहा है. उन्होंने कहा कि जो फैसला चुनाव आयोग ने लिया है मुझे लगता है कहीं ना कहीं मसला गुजरात का है. क्योंकि बंगाल में तृणमूल के पास इस वक्त संख्या है. चुनाव आयोग ने क्यों ऐसा फैसला लिया है? अगर आप कानून की किताब को देखो या कोई रूल देखो कोई ऐसी प्रक्रिया रूल में नहीं है ना ही रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट में है. उन्होंने कहा कि यह तो खुली वोटिंग है. इनडायरेक्ट वोटिंग है, इसमें कोई डायरेक्ट वोटिंग नहीं है इसमें तो आप अपनी प्रेफरेंस देंगे. तो यह फैसला कहां से आ गया? साथ ही उन्होंने कहा कि मैं कोई आरोप नहीं लगाना चाहता. अगर चुनाव आयोग ने फैसला लिया तो ज़रूर सोच-समझ कर लिया है. लेकिन इसकी टाइमिंग जो है वह ठीक नहीं है.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पीयूसीएल के इलेक्शन में कहा था कि डायरेक्ट वोटिंग में आपको नोटा देना चाहिए. यह तो इलेक्शन कमीशन का अपना फैसला है. इसे चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के जरिए नहीं लिया.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.