पिथौरागढ़ में बादल फटा, 17 की मौत; सेना के पांच जवान सहित 11 लापता

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पिथौरागढ़ तहसील धारचूला में कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग में मालपा में बादल फटने से 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि सेना के पांच जवान सहित 11 लोग लापता हैं। दो जवान और एक जेसीओ को मलबे से सकुशल निकाल लिया गया है। मालपा नाला उफान में आने से तीन होटल बह गए। साथ ही दर्जनों लोग घायल हैं। घायलों में दो पुलिस के जवान भी शामिल हैं। अब तक 17 लोगो के शव बरामद कर लिए गए हैं।

धारचूला तहसील से आगे पांगला से लेकर मालपा तक जगह-जगह भूस्खलन से भारी तबाही मची। यह मार्ग कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग है। बादल फटने की घटना रात्रि 2 बजकर 45 मिनट की है। पिथौरागढ़ मुख्यालय से 145 किलोमीटर दूर घटियाबगड़ में सेना का कैंप है। काली नदी के किनारे स्थित इस कैंप में बादल फटने से तबाही मची। इससे करीब नौ किलोमीटर दूर मालपा में भी मांगती नाला उफान पर आया और वहां भी तबाही मची।

मांगती नाले के पास सेना के तीन ट्रक मय सामान के बह गए हैं। चार अन्य वाहन भी गायब है। कुमाऊ बटालियन का एक जवान लापता है। सेना के एक जेसीओ का शव मिल चुका है और एक सिविलियन महिला का शव भी मिला है। एक सिविलियन वृद्धा भी लापता बताई जा रही है।

धारचूला से 8 किमी दूर ऐलागाड से हाइवे बंद है। मांगती और सिमखोला में मोटर पुल क्षतिग्रस्त हो गए। गरबाधार में सेना सहित अन्य वाहन बहने की सूचना है। साथ ही खच्चर भी बह गए हैं। काली नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इससे नदी किनारे अलर्ट जारी कर दिया है।

अब तक 17 लोगों के शव निकाले गए हैं। एक महिला काली नदी पार नेपाल में नजर आई। वह घायल बताई जा रही है। छंकंडे में 50 मीटर कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग बह गया है। यह क्षेत्र संचार विहीन है। इस कारण सूचनाएं भी प्रशासन को समय से नहीं मिल पा रही है।

मालपा कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग में तीसरे दिन की पैदल यात्रा में पड़ता है। 1998 से पहले यह यात्रा का तीसरा पैदल पड़ाव होता था। 17 अगस्त 1998 की रात यहाँ पर बादल फटने 60 कैलास मानसरोवर यात्रियों आईटीबीपी पुलिस जवानो सहित 260 लोगो की मौत हो गई थी। पड़ाव ध्वस्त हो गया था।

अब मालपा नाले के दूसरी तरफ फिर से लोग बसने लगे और कुछ होटल भी खुल गए। कैलास मानसरोवर यात्रियों को दिन का भोजन यही पर कराया जाता है। भारत चीन व्यापार में जाने वाले और उच्च हिमालयी गावो के लोग धारचूला आने जाने के दौरान रात्रि विश्राम भी करते है। मालपा स्थान भारत नेपाल सीमा पर मालपा नाले के किनारे है। यहां से काली नदी मात्र 50 मीटर दूर पर बहती है।

पिथौरागढ़ के धारचूला में भी देर शाम बादल फटने से ढुंगातोली गांव के कई घरों और खेतों में मलबा घुस गया। दहशतजदा 15 परिवारों ने गांव छोड़ दिया है। प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित स्थान में शरण दी है। दूसरी ओर इसी जिले के मदकोट गांव में शनिवार रात बादल फटने से ध्वस्त हुए दो मकानों के मलबे से दो शव अभी तक नहीं निकाले जा सके। हादसे में तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि तीन घायल हो गए। वहीं, कोटद्वार में बरसाती नदी के उफान में दो पुलिया बहने से तीन गांव अलग-थलग पड़ गए हैं। कोटद्वार में एक सप्ताह में तीसरी बार बादल फटने से ग्रामीणों में घबराए हुए है।

कैलास मानसरोवर यात्रियों के दल सुरक्षित

पिथौरागढ़ जिले के मालपा में भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद कैलास मानसरोवर व आदि कैलास यात्रा के दल सुरक्षित हैं। जो दल जहां पर हैं, उन्हें वहीं रोक दिया गया है। यात्रा संचालक कुमाऊं मंडल विकास निगम के जीएम त्रिलोक सिहं मर्तोलिया ने बताया कि कैलास मानसरोवर यात्रा का 16 वें दल को सिरखा पड़ाव में, वापस लौट रहे 12 वें दल को धारचूला में, 13 वें, 14 व 15 वें दल को गूंजी व चीन में तथा आदि कैलास के दल को बूंदी में रोक दिया गया है। संचार सेवा प्रभावित होने की वजह से संदेशवाहक के जरिये कई दलों को रोका गया। जीएम के अनुसार यात्रियों के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं।

सीएम पहुंचे पिथौरागढ़

सीएम त्रिवेंद्र रावत हेलीकॉप्टर से पिथौरागढ़ पहुंचे। यहां उन्होंने हवाई पट्टी में डीएम से घटनाक्रम की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने आपदाग्रस्त क्षेत्रो का हवाई निरीक्षण भी किया।

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